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एक दिन नसीब हुआ पानी, फिर छह किमी की दौड़
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पिथौरागढ़। जिले के दूरस्थ धामीगौंडा, धौलकांडा, मैथल, कुनकटिया और दौबांस क्षेत्र में जल संकट नहीं सुलझ सका है। लोगों की शिकायत के बाद केवल एक दिन पानी आया।
इसके बाद फिर से लोगों को छह किमी दूर स्रोत से ही पानी ढोना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर मूनाकोट विकासखंड के धामीगौंडा, धौलकांडा, मैथल, कुनकटिया, दोबांस आदि स्थानों के 100 से अधिक परिवार पिछले 14 दिन से पानी के लिए परेशान हैं।
योजना में पानी न आने की शिकायत पर जल संस्थान ने पेयजल स्रोत को ठीक कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी पानी एक दिन केवल पांच मिनट तक आया। इसके बाद फिर से वही हालात हो गए हैं। कुछ लोग वाहनों से पानी ढो रहे हैं।
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जब कोई परिवार अपने लिए पानी लेने जाता है, तो रास्ते में लोग अपने खाली बर्तन देकर पानी लाने की अपील करते रहते हैं। क्षेत्र के सभी परिवार खेती और पशुपालन से भी जुड़े हैं ऐसे में पशुओं के लिए पानी जुटाना और अधिक मुश्किल हो रहा है।
पानी की चिंता में खाना बनाने का समय भी नहीं मिल रहा है। लोग खाने के बजाय अगले दिन पानी कैसे मिलेगा, इसकी चिंता कर परेशान रहते हैं।
-रेवती पांडेय
टैक्सी और निजी वाहनों से पानी ढोकर अपनी और जानवरों की प्यास बुझा रहे हैं। छह किमी दूर स्रोत होने के कारण वहां तक पहुंचना आसान नहीं है।
-भागीरथी पांडेय
हर सुबह पानी की चिंता रहती है। पीने के लिए ही पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में खाना भी बनाना कभी मुश्किल हो जाता है।
-जयंती पांडेय
पिछले कई दिनों से पानी का संकट बना हुआ है। सुबह से ही पानी जुटाने के लिए प्रयास करने होते हैं। पूरा दिन पानी की आपूर्ति में बीत जाता है।
-जानकी पांडेय
जहां से योजना बनी है उस स्रोत में पानी कम है। क्षेत्र में गर्मी में इस तरह की दिक्कतें रहती हैं। जेई को स्रोत में पानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर पानी बढ़ने की संभावना होगी तो पानी की दिक्कत नहीं होगी। पेयजल समस्या का समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे।
- पीएस रावत, एसई जल संस्थान पिथौरागढ़।
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इसके बाद फिर से लोगों को छह किमी दूर स्रोत से ही पानी ढोना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर मूनाकोट विकासखंड के धामीगौंडा, धौलकांडा, मैथल, कुनकटिया, दोबांस आदि स्थानों के 100 से अधिक परिवार पिछले 14 दिन से पानी के लिए परेशान हैं।
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योजना में पानी न आने की शिकायत पर जल संस्थान ने पेयजल स्रोत को ठीक कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी पानी एक दिन केवल पांच मिनट तक आया। इसके बाद फिर से वही हालात हो गए हैं। कुछ लोग वाहनों से पानी ढो रहे हैं।
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जब कोई परिवार अपने लिए पानी लेने जाता है, तो रास्ते में लोग अपने खाली बर्तन देकर पानी लाने की अपील करते रहते हैं। क्षेत्र के सभी परिवार खेती और पशुपालन से भी जुड़े हैं ऐसे में पशुओं के लिए पानी जुटाना और अधिक मुश्किल हो रहा है।
पानी की चिंता में खाना बनाने का समय भी नहीं मिल रहा है। लोग खाने के बजाय अगले दिन पानी कैसे मिलेगा, इसकी चिंता कर परेशान रहते हैं।
-रेवती पांडेय
टैक्सी और निजी वाहनों से पानी ढोकर अपनी और जानवरों की प्यास बुझा रहे हैं। छह किमी दूर स्रोत होने के कारण वहां तक पहुंचना आसान नहीं है।
-भागीरथी पांडेय
हर सुबह पानी की चिंता रहती है। पीने के लिए ही पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में खाना भी बनाना कभी मुश्किल हो जाता है।
-जयंती पांडेय
पिछले कई दिनों से पानी का संकट बना हुआ है। सुबह से ही पानी जुटाने के लिए प्रयास करने होते हैं। पूरा दिन पानी की आपूर्ति में बीत जाता है।
-जानकी पांडेय
जहां से योजना बनी है उस स्रोत में पानी कम है। क्षेत्र में गर्मी में इस तरह की दिक्कतें रहती हैं। जेई को स्रोत में पानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर पानी बढ़ने की संभावना होगी तो पानी की दिक्कत नहीं होगी। पेयजल समस्या का समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे।
- पीएस रावत, एसई जल संस्थान पिथौरागढ़।