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शासन-प्रशासन को आइना दिखाकर काट डाली चार किमी सड़क
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गनौरा के लिए खुद के प्रयास से सड़क काटने का कार्य करते ग्रामीण।
- फोटो : PITHORAGARH
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बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। गनौरा के ग्रामीणों ने श्रमदान से चार किलोमीटर सड़क काटकर शासन-प्रशासन को आइना दिखाया है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क काटने की मांग कर रहे थे लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण सड़क नहीं कट पाई। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं सड़क बनाने का फैसला लिया।
एक ओर जहां सरकार हर गांव को मूलभूत सुविधा सड़क से जोड़ने की बात करती है, जबकि स्थिति इसके ठीक उलट है। आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। इसी तरह का मामला विश्व पर्यटन एवं धार्मिक स्थल पाताल भुवनेश्वर से लगे गांव बेड़ीनाग तहसील के पाताल भुवनेश्वर से लगे गनौरा में देखने को मिला है। ग्रामीणों ने खुद श्रमदान करके पाताल भुवनेश्वर मार्ग विनागी घाटी से गनौरा तक चार किमी कच्ची सड़क अपने बलबूते पर काट डाली है। ग्रामीण वर्ष 2000 से सड़क बनाने की मांग कर रहे थे लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण आज तक सड़क नहीं कट पाई।
ग्रामीणों ने सड़क बनाने की मांग के लिए कई बार आंदोलन और उच्च अधिकारी और जन प्रतिनिधियों को पत्र भी दिए लेकिन इसके बाद भी सड़क नहीं कट पाई। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती थी। अधिक दूरी होने के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को डोली में रखकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता था। इसे ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क स्वीकृति का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों से स्वयं ही सड़क काट दी। ग्रामीण विक्रम, कुंदन, मनोज, भग्गू, सुरेश, नरेंद्र, रामू, दीपांशु सूरज पूरन, नारायण सिंह, उमेद सिंह, शमशेर ने सड़क निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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एक ओर जहां सरकार हर गांव को मूलभूत सुविधा सड़क से जोड़ने की बात करती है, जबकि स्थिति इसके ठीक उलट है। आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। इसी तरह का मामला विश्व पर्यटन एवं धार्मिक स्थल पाताल भुवनेश्वर से लगे गांव बेड़ीनाग तहसील के पाताल भुवनेश्वर से लगे गनौरा में देखने को मिला है। ग्रामीणों ने खुद श्रमदान करके पाताल भुवनेश्वर मार्ग विनागी घाटी से गनौरा तक चार किमी कच्ची सड़क अपने बलबूते पर काट डाली है। ग्रामीण वर्ष 2000 से सड़क बनाने की मांग कर रहे थे लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण आज तक सड़क नहीं कट पाई।
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ग्रामीणों ने सड़क बनाने की मांग के लिए कई बार आंदोलन और उच्च अधिकारी और जन प्रतिनिधियों को पत्र भी दिए लेकिन इसके बाद भी सड़क नहीं कट पाई। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती थी। अधिक दूरी होने के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को डोली में रखकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता था। इसे ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क स्वीकृति का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों से स्वयं ही सड़क काट दी। ग्रामीण विक्रम, कुंदन, मनोज, भग्गू, सुरेश, नरेंद्र, रामू, दीपांशु सूरज पूरन, नारायण सिंह, उमेद सिंह, शमशेर ने सड़क निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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