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वाटर पार्क के निर्माण में पेयजल योजना ध्वस्त होने से भड़के ग्रामीण
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पिथौरागढ़। चंडाक रोड स्थित किमचौरा में वाटर पार्क के निर्माण के दौरान बजेटी और सरस्वती विहार कॉलोनी को जाने वाली पेयजल योजना के ध्वस्त होने से ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। नाराज ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर जिला प्रशासन और नगर पालिका का पुतला फूंका। उन्होंने वहां पर वाटर पार्क का निर्माण न करने की मांग की।
सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण पूर्व विधायक मयूख महर के नेतृत्व में सिल्थाम तिराहे में एकत्र हुए। उन्होंने यहां नगर पालिका और जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन करते हुए नगर पालिका और प्रशासन का पुतला फूंका। इस दौरान पूर्व विधायक मयूख महर ने कहा कि बजेटी ग्राम और सरस्वती विहार के लिए वर्ष 2015-16 में बनाई गई पेयजल योजना नगर पालिका और प्रशासन ने ध्वस्त कर दी है। उसी स्थान पर एक प्राचीन नौला भी जिसका अस्तित्व भी खतरे में है। ऐतिहासिक धरोहर जसूली देवी शौक्याणी की धर्मशाला पर भी खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ नगर में पहले से ही पेयजल संकट है। पेयजल योजना को ध्वस्त कर वहां वाटर पार्क बनाना अपने आप में नगर पालिका और जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में वाटर पार्क से ज्यादा पेयजल की जरूरत है। उन्होंने शीघ्र वाटर पार्क के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर, रमेश कापड़ी, मनोज ओझा, मदन भट्ट, जितेंद्र महर, भूरे मियां, जावेद खान, ऋषेंद्र महर, खीमराज जोशी, तिलक जोशी, हिमांशु ओझा, जीवन वल्दिया, पवन मेहरा, हीरा बिष्ट, भुवन पांडे, सुभाष पुनेड़ा, पद्मा बिष्ट, शंकर लाल, रोहन सौन, राकेश सौन सहित कई ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण पूर्व विधायक मयूख महर के नेतृत्व में सिल्थाम तिराहे में एकत्र हुए। उन्होंने यहां नगर पालिका और जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन करते हुए नगर पालिका और प्रशासन का पुतला फूंका। इस दौरान पूर्व विधायक मयूख महर ने कहा कि बजेटी ग्राम और सरस्वती विहार के लिए वर्ष 2015-16 में बनाई गई पेयजल योजना नगर पालिका और प्रशासन ने ध्वस्त कर दी है। उसी स्थान पर एक प्राचीन नौला भी जिसका अस्तित्व भी खतरे में है। ऐतिहासिक धरोहर जसूली देवी शौक्याणी की धर्मशाला पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ नगर में पहले से ही पेयजल संकट है। पेयजल योजना को ध्वस्त कर वहां वाटर पार्क बनाना अपने आप में नगर पालिका और जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में वाटर पार्क से ज्यादा पेयजल की जरूरत है। उन्होंने शीघ्र वाटर पार्क के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर, रमेश कापड़ी, मनोज ओझा, मदन भट्ट, जितेंद्र महर, भूरे मियां, जावेद खान, ऋषेंद्र महर, खीमराज जोशी, तिलक जोशी, हिमांशु ओझा, जीवन वल्दिया, पवन मेहरा, हीरा बिष्ट, भुवन पांडे, सुभाष पुनेड़ा, पद्मा बिष्ट, शंकर लाल, रोहन सौन, राकेश सौन सहित कई ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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