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पिथौरागढ़: डोली पर बैठे बीमार बुजुर्ग ने हाथ जोड़कर लगाई पुकार, सड़क बनती तो हमें नहीं होना पड़ता लाचार

Sat, 29 Aug 2026 10:43 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Sat, 29 Aug 2026 10:43 PM IST
सार

गणाई गंगोली तहसील के बासीखेत गांव में सड़क के अभाव में ग्रामीणों को बीमारों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। विकास के दावों के बीच अब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंची है।

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Villagers carried sick elderly man on a stretcher and ran on a dilapidated road in Ganai Gangoli Pithoragarh
बीमार बुजुर्ग को डोली पर बैठाकर बदहाल रास्ते पर दौड़ पड़े ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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सड़क के अभाव में हम जैसे बीमार बुजुर्गों के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना चुनौती है। समय पर अस्पताल न पहुंचने से हमारे अपनों की रास्ते पर मौत हो रही है। कब तक हम इन बदहाल व्यवस्थाओं के चलते अपनों को खोते रहेंगे। उम्र के इस पड़ाव में आंखों में आंसू और दर्द से छटपटा रहे डोली पर बैठे बीमार बुजुर्ग ने हाथ जोड़कर सिस्टम से यह पुकार लगाई। उन्होंने कहा कि सड़क बनती तो हमें लाचार नहीं होना पड़ता। डोली पर बैठे नारायण सिंह ने नम आंखों से व्यवस्था से पुकार लगाई।

गणाई गंगोली तहसील के बासीखेत गांव में सड़क के अभाव में ग्रामीणों को बीमारों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। विकास के दावों के बीच अब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। ऐसे में शनिवार को 90 वर्षीय नारायण सिंह डसीला अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया, ग्रामीणों ने उन्हें डोली पर बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। यहां से उन्हें वाहन से 24 किलोमीटर दूर गणाई गंगोली ले जाया गया। इसके बाद परिजन उन्हें बरेली के लिए रवाना हुए।

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ढाई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई के बाद मोटर मार्ग
ग्रामीणों का कहना है कि बीमारों और गर्भवतियों को बदहाल रास्ते पर खतरे के बीच डोली से ले जाना एक बड़ी मजबूरी है। ढाई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद ही उन्हें वाहन मिल पाता है। सड़क न होने से कई बार समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारण अपनों की मौत हो जाती है। वे इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क बनती तो उन्हें लाचार नहीं होना पड़ता है।

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समय पर अस्पताल न पहुंचने से महिला की हुई थी मौत
10 महीने पहले बासीखेत गांव की बसंती देवी (70) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों ने उसे डोली के सहारे ढाई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर देवराड़ी पंत में मुख्य सड़क पहुंचाया। यहां से ग्रामीण उसे वाहन के सहारे चार किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकोट ले गए। यहां इलाज के लिए डॉक्टर नहीं मिलने से ग्रामीण उसे 14 किलोमीटर दूर सीएचसी गणाई ले जा रहे थे। अस्पताल पहुंचने से पहले की उन्होंने दम तोड़ दिया। क्षेत्र में न तो इलाज की बेहतर सुविधा है और ना ही बीमारों को समय पर हायर सेंटर पहुंचाने के लिए सड़क। ऐसे में आए दिन बीमार काल के गाल में समा रहे हैं और सिस्टम इससे बेखबर है।

बोले ग्रामीण
गांव तक सड़क नहीं होने से बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सिर्फ डोली सहारा है। रास्ता भी चलने लायक नहीं है। ऐसे में कई बार समय पर अस्पताल न पहुंचने पर हमारे अपनों की रास्ते पर मौत हो रही है। -महेश डसीला, पूर्व सैनिक, बासीखेत

हम वर्षों से सड़क की मांग करते हुए दुश्वारियां झेल रहे हैं। हमारे अपने समय पर अस्पताल न पहुंचने से रास्ते पर दम तोड़ रहे हैं। कुछ समय पहले ही समय पर अस्पताल न पहुंचने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। क्षेत्र में न तो बेहतर इलाज की सुविधा है और न ही समय पर बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सड़क। -एड. ठाकुर सिंह डसीला, बासीखेत

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