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पीठ पर राशन: सिर्फ नाम का मुफ्त राशन...घर तक पहुंचाने में खर्च हो रहे हैं 600 रुपये, ग्रामीण परेशान

Sat, 28 Jun 2025 03:13 PM IST
हीरा मेहरा रमेश धामी, संवाद
रमेश धामी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 28 Jun 2025 03:13 PM IST
सार

सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाले मुफ्त खाद्यान्न को घर तक पहुंचाने में मेतली के ग्रामीणों को 600 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

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Villagers are spending Rs 600 to get the free food grains from the cheap ration shop delivered to their homes
मेतली के ग्रामीण इस तरह पीठ पर ढोकर सरकारी राशन घर पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार ने लोगों को मुफ्त राशन देने की योजना चलाई है लेकिन बंगापानी तहसील के मेतली के ग्रामीणों को इसके लिए 600 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाले मुफ्त खाद्यान्न को घर तक पहुंचाने के लिए वे 58 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए मजबूर हैं।

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मेतली गांव के भटबटा, देवलखेत, कुमर्यागैर, दोगड़ और बथ्थी तोक के ग्रामीणों को मुफ्त राशन लेने के लिए लुमती और चामी स्थित सस्ते गल्ले की दुकान पर जाना पड़ता है। दुकान और फिर घर पहुंचने के लिए बदहाल रास्ते पर आठ किलोमीटर पैदल और वाहन से 50 किलोमीटर की दूरी तय करना एकमात्र विकल्प है। दुकान और वहां से घर वापसी के लिए 400 से 600 रुपये तक किराया चुकाना पड़ रहा है। इसमें उनका पूरा दिन भी बर्बाद हो रहा है।

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भूपेंद्र सिंह परिहार, लक्ष्मण सिंह, मथुरा देवी, दरपान सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सस्ते गल्ले की दुकान दूर होने और गांव तक सड़क न होने से मुफ्त राशन घर पहुंचते-पहुंचते बाजार भाव से भी महंगा पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम कब तक पीठ पर राशन ढोकर जीवन यापन करेंगे, सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। 

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बीमारों और गर्भवतियों को पीठ पर लादकर पहुंचाया जाता है अस्पताल
ग्रामीणों का कहना है कि आबादी की दृष्टि से सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने के बाद भी यहां सड़क नहीं है। सड़क स्वीकृत तो है लेकिन इसका अभी सिर्फ सर्वे ही हुआ है। बीमारों और गर्भवतियों को पीठ या डोली पर अस्पताल पहुंचाना मजबूरी है।

बोले ग्रामीण-

गांव तक सड़क नहीं पहुंचने से हमें दिक्कत झेलनी पड़ रही है। मुफ्त राशन भी बाजार भाव में घर पहुंच रहा है। सड़क बनती तो हमारी परेशानी कुछ हद तक कम हो जाती। - ममता परिहार

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान काफी दूर है। दुकान पहुंचने और घर वापसी के लिए 400 से 600 रुपये किराया लग रहा है। ऐसे में मुफ्त राशन महंगा पड़ रहा है। हमारी इस समस्या का उचित समाधान सरकार और प्रशासन को करना चाहिए। - दरबान सिंह

 

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