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पुनेड़ी गांव में आवारा जानवर फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय से सटे सब्जी उत्पादक पुनेड़ी गांव के लोग लावारिस जानवरों के आतंक से परेशान हैं। लावारिस जानवर ग्रामीणों की खेती को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पालिका लावारिस जानवरों से निजात नहीं दिलाएगी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सब्जी उत्पादक पुनेड़ी गांव में अधिकतर ग्रामीण सब्जी उत्पादन का काम करते हैं। इन परिवारों की आजीविका सब्जी उत्पादन पर ही निर्भर है, लेकिन लावारिस पशु सब्जी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके चलते सब्जी उत्पादक परेशान हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक सिंह रावत ने बताया कि गांव में लावारिस जानवर उनकी फसलों और सब्जी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि क्षेत्र के अधिकतर ग्रामीण सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। ग्रामीण सुनील पुनेड़ा ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में लावारिस जानवरों ने एक लाख मूल्य से अधिक की सब्जी बर्बाद कर दी है।
ग्रामीण प्रदीप रावत, उमेश पुनेड़ा, निर्मल भट्ट ने कहा कि लावारिस जानवरों के कारण उन्हें ठंड में खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है। लोग नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों को छोड़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी लावारिस जानवरों को छोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। किशन सिंह ने कहा कि यदि जल्दी ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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सब्जी उत्पादक पुनेड़ी गांव में अधिकतर ग्रामीण सब्जी उत्पादन का काम करते हैं। इन परिवारों की आजीविका सब्जी उत्पादन पर ही निर्भर है, लेकिन लावारिस पशु सब्जी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके चलते सब्जी उत्पादक परेशान हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक सिंह रावत ने बताया कि गांव में लावारिस जानवर उनकी फसलों और सब्जी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि क्षेत्र के अधिकतर ग्रामीण सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। ग्रामीण सुनील पुनेड़ा ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में लावारिस जानवरों ने एक लाख मूल्य से अधिक की सब्जी बर्बाद कर दी है।
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ग्रामीण प्रदीप रावत, उमेश पुनेड़ा, निर्मल भट्ट ने कहा कि लावारिस जानवरों के कारण उन्हें ठंड में खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है। लोग नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों को छोड़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी लावारिस जानवरों को छोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। किशन सिंह ने कहा कि यदि जल्दी ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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