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Pithoragarh News: वाइब्रेंट गांवों में फिर नजर आएंगे आधुनिकता की चक्की में पिसे घराट

Sat, 13 Jun 2026 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 13 Jun 2026 10:46 PM IST
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Traditional water mills, ground by the millstones of modernity, will once again be seen in 'Vibrant Villages'.
पिथौरागढ़। आधुनिकता की चक्की में पिसकर दम तोड़ रही पहाड़ों की पारंपरिक घराट (पनचक्की) संस्कृति को उत्तराखंड के सीमांत जिले में एक नया जीवन मिलने जा रहा है। पिथौरागढ़ के वाइब्रेंट विलेज मिलम और पांछू में जल्द ही एक बार फिर गधेरों के पानी से घराट गूंजेंगे। इससे न सिर्फ सदियों पुरानी विरासत बचेगी बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की जिंदगी भी आसान होगी।
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सीमांत जिले में कभी लगभग हर गांव में घराट ही अनाज पीसने का एकमात्र साधन थे जो आधुनिकता के दौर में लगभग विलुप्त हो गए हैं। इनकी जगह अब बिजली चलित चक्की और मिलों ने ले ली है। सीमांत जिले में जल्द ही इस घराट संस्कृति का संरक्षण होगा। यह काम होगा मुनस्यारी के वाइब्रेंट विलेज मिलम और पांछू में। ये गांव बिजली से रोशन नहीं हैं। ऐसे में यहां के ग्रामीणों को गेहूं सहित अन्य अनाज पिसवाने के लिए 80 किलोमीटर दूर विकासखंड मुख्यालय आना पड़ता है। घराट लगने से ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान होगा। इन गांवों में दो घराट स्थापित किए जाएंगे। इस पर 85,75,000 रुपये खर्च होंगे। अतीत का हिस्सा बन चुकी घराट संस्कृति को इन गांवों से फिर नया जीवन मिलेगा। संवाद
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आधुनिकता ने बदली तस्वीर
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं घराट में सामूहिक रूप से एकत्र होकर लोकगीत गाती थीं। पानी से चलने वाले इस घराट में पिसा अनाज पौष्टिक माना जाता था। यह घराट पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत आधार थे। आधुनिकता के दौर में पहले डीजल तो अब बिजली चलित चक्की के प्रचलन में आने से घराट का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
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मिलम और पांछू में पर्याप्त है पानी
हिमालय के नजदीक बसे मिलम और पांछू गांव में पर्याप्त पानी है। यहां गाड़-गधेरे हमेशा पानी से लबालब रहते हैं। इन्हीं गधेरों के पानी को घराट तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी से घराट संचालित होंगे और ग्रामीणों की परेशानी दूर होने के साथ विलुप्त होने के कगार पर पहुंची इस तकनीक को नया जीवन मिलेगा।


कोट
वाइब्रेंट गांव मिलम और पांछू में घराट स्थापित किए जाएंगे। इसका लाभ ग्रामीणों को मिलेगा। इससे विलुप्त हो रही घराट संस्कृति को भी नया जीवन मिलेगा। -प्रदीप नेगी, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई, पिथौरागढ़
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