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दुश्मन तक पहुंचने से पहले ही कई बार देते हैं मौत को चकमा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 11:51 PM IST
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To protect the China border, soldiers are reaching forward posts by crossing inaccessible paths on foot
इस तरह दुर्गम रास्तों को पार कर मिलम से देश की अंतिम चौकी दुंग पहुंचते हैं आईटीबीपी के जवान। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। सीमा पर जान हथेली पर लेकर जवान खड़े रहते हैं इस बात से सभी वाकिफ हैं पर क्या आपको पता है कि सरहद तक पहुंचने के लिए भी जवानों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। हम बात कर रहे हैं हिमवीरों की जो उफनाई नदियों, भूस्खलन और ग्लेशियर जैसी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हर कदम पर मौत को मात देकर 54 किमी की पैदल दूर तय करके सीमा तक पहुंचते हैं। भारत-चीन के बीच हुए सीमा विवाद के बाद से सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
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बीआरओ वर्ष 2008 से धापा-मिलम सड़क का निर्माण कार्य कर रहा है। बुगडियार से मिलम तक करीब 43 किमी सड़क में से 27 किमी सड़क बन गई हैं जबकि 16 किमी सड़क काटना अभी बाकी हैं। धापा से बुगडियार तक एबीसीआई कंपनी करीब 21 किमी सड़क काट चुका है। वर्तमान में तीन किमी सड़क का निर्माण किया जाना शेष है। सड़क के समय से नहीं बनने के कारण सुरक्षा एजेंसियों को जोखिम भरा सफर पैदल ही तय करके चीन सीमा पर पहुंचना पड़ रहा है।
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सीमा तक पहुंचने के लिए जवान लीलम तक वाहन से जाते हैं। लीलम से बुगडियार पहुंचने के लिए जवानों को करीब 14 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। बुगडियार से रिलकोट पहुंचने के लिए 13 किमी और रिलकोट से मिलम पहुंचने के लिए 18 किमी पैदल चलना पड़ता है। यहां से जवानों को 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित देश की अंतिम चौकी तक पहुंचने के लिए करीब नौ किमी पैदल चलना पड़ता है। आईटीबीपी के जवानों को हथियार, रसद और अन्य सामान भी देश की अंतिम चौकी तक पहुंचाना पड़ता है। बावजूद इसके जवान पूरी मुस्तैदी के साथ चीन की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
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तवाघाट- लिपुलेख सड़क है बदहाल
पिथौरागढ़। तवाघाट से चीन सीमा के लिपुलेख तक सड़क पहुंच गई हैं लेकिन सड़क काफी बदहाल है। सड़क के बदहाल होने की वजह से जवानों का सफर काफी जोखिम भरा रहता है। दावे जैसी अग्रिम चौकियों पर पहुंचने के लिए जवानों को काफी पैदल भी चलना पड़ता है।
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