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छिपलाकेदार के सुगम रास्ते पर कस्तूरा मृग विहार का रोड़ा
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:25 PM IST
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छिपलाकेदार में स्थित नंदाकुंड
- फोटो : अमर उजाला
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पवित्र धार्मिक स्थल एवं सुरम्य पर्यटन स्थल छिपलाकेदार के लिए सुगम रास्ता बनने के बीच अस्कोट कस्तूरी मृगविहार रोड़ा बन रहा है। यूं तो छिपलाकेदार जाने के लिए कई पैदल रास्ते हैं, जो बेहद जटिल और अधिक दूरी वाले हैं। उत्तराखंड शासन ने वर्ष 2013 में बंगापानी तहसील के सेराघाट से खड़तोली होते हुए 30 किमी पैदल मार्ग को मंजूरी दी थी। इसके लिए 1.77 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर है, लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी न मिल पाने के कारण रास्ता नहीं बन पा रहा है।
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समुद्र तल से 5050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार पवित्र धर्मस्थल है। छिपलाकेदार के नंदा कुंड में उपनयन संस्कार कराने का विशेष महत्व है। इस क्षेत्र में राज्य पुष्प ब्रह्मकमल बहुतायत में मिलता है। नंदाष्टमी को यहीं से ब्रह्मकमल लाकर मां नंदा के मंदिरों में चढ़ाए जाते हैं। छिपलाकेदार का लोक देवताओं के जागर आदि में भी जिक्र आता है। वहां स्थित सुंदर बुग्याल विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। छिपलाकेदार से हिमालय के शानदार नजारे दिखते हैं। छिपलाकेदार क्षेत्र में भईमन गुफा, भनार गुफा, तीजम गुफा भी आकर्षण का केंद्र हैं। धार्मिक यात्राएं तो छिपलाकेदार में होती ही हैैं, पर्यटक, ट्रैकर भी छिपलाकेदार बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
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इस रमणीक स्थल के दीदार करने में सबसे बड़ी बाधा सुगम पैदल मार्ग का न होना है। इसी को देखते हुए शासन ने सेराघाट, खड़तोली-छिपलाकेदार पैदल मार्ग को मंजूरी दी थी। वर्तमान में छिपलाकेदार के लिए धारचूला-खेला-तीजम होते हुए पैदल मार्ग है, जिसकी दूरी 57 किमी है। बरम-कनार से छिपलाकेदार जाने वाले पैदल मार्ग की दूरी 43 किमी और जाराजीबली से छिपलाकेदार जाने वाले मार्ग की दूरी 38 किमी है। सेराघाट-खड़तोली से छिपलाकेदार के लिए रास्ता बन जाता तो इसकी दूरी 30 किमी होने के साथ ही काफी सुगम भी होती।
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पर्यावरणीय प्रभाव का जायजा लिया
सेराघाट-खड़तोली पैदल मार्ग का निर्माण लोनिवि के अस्कोट डिवीजन को करना है। डिवीजन के अधिशासी अभियंता आनंद बल्लभ कांडपाल ने बताया कि मृगविहार के दायरे में होने से पैदल निर्माण में बाधा आ रही है। पर्यावरण मंत्रालय से आपत्तियां लगी हैं। उनका जवाब तैयार किया जा रहा है। हाल में उनके नेतृत्व में टीम ने छिपलाकेदार क्षेत्र का दौरा कर पर्यावरणीय प्रभाव का जायजा लिया है। शासन के माध्यम से रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जा रही है। उम्मीद है कि जल्द मार्ग निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।