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बारातियों के लिए बनाए लिफाफों के नोट हटाने पड़े
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 10 Nov 2016 10:26 PM IST
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बारातियों के लिए बनाए लिफाफों के नोट हटाने पड़े
- फोटो : अमर उजाला
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हनुमान मंदिर मोहल्ला निवासी उमेश चंद्र बिष्ट और सविता बिष्ट की बेटी तनुजा का विवाह 18 नवंबर को तय हुआ है। 16 नवंबर को गणेश पूजन और 17 नवंबर को महिला संगीत की तारीख तय है। विवाह के कम दिन बचे होने के कारण उमेश बिष्ट ने तैयारी पहले से शुरू कर दी थी। उन्होंने बारातियों को पिठ्या लगाने के लिए लिफाफों में 500-500 के जो नोट डाले थे वह आठ नवंबर की रात प्रचलन से बाहर हो गए। अब लिफाफों में डाले गए यह नोट हटाने पड़ गए हैं लेकिन समस्या यह है कि उनकी जगह नया नोट कहां से डाला जाए। सरकार द्वारा अचानक लिए गए फैसले से बिष्ट का परिवार तनाव में आ गया है।
व्यवसायी बिष्ट ने बताया कि बारातघर वाले को तो चेक से भुगतान के लिए राजी कर लिया गया है, लेकिन बाजार के सामान, फल, कपड़े, फर्नीचर आदि खरीदने के लिए पैसा नहीं है। बेटी के विवाह के लिए जो पैसा बचाकर रखा था उनमें ज्यादातर 500, 1000 के ही नोट थे। वह सभी प्रचलन से बाहर हो गए हैं। बैंक से भी एक दिन में इतनी ज्यादा रकम एक्सचेंज नहीं हो पा रही है।
लोगों के पास भी 100 और 50 रुपए के नोट नहीं हैं। जिनके पास हैं तो वह देना नहीं चाहते। उन्होंने बताया कि बेटी के विवाह में कितना खर्च आता है, यह सभी को मालूम है और आज के महंगाई के दौर में खर्च की कोई सीमा भी नहीं रहती। उमेश बिष्ट भारी तनाव की स्थिति में आ गए हैं। बेटी के विवाह का कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए वह मित्रों की मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ सामान उधार में उठाना पड़ेगा। कर्मकांड, विवाह संस्कार में लगने वाली धनराशि की व्यवस्था करनी पड़ेगी। ठीक उमेश बिष्ट की जैसी स्थिति अन्य लोगों की भी है। विवाह के लग्न ठीक 15 नवंबर से शुरू होंगे। नवंबर में पहाड़ों में मौसम खुशनुमा रहने के कारण ज्यादातर लोग इसी महीने विवाह करना उचित मानते हैं।
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व्यवसायी बिष्ट ने बताया कि बारातघर वाले को तो चेक से भुगतान के लिए राजी कर लिया गया है, लेकिन बाजार के सामान, फल, कपड़े, फर्नीचर आदि खरीदने के लिए पैसा नहीं है। बेटी के विवाह के लिए जो पैसा बचाकर रखा था उनमें ज्यादातर 500, 1000 के ही नोट थे। वह सभी प्रचलन से बाहर हो गए हैं। बैंक से भी एक दिन में इतनी ज्यादा रकम एक्सचेंज नहीं हो पा रही है।
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लोगों के पास भी 100 और 50 रुपए के नोट नहीं हैं। जिनके पास हैं तो वह देना नहीं चाहते। उन्होंने बताया कि बेटी के विवाह में कितना खर्च आता है, यह सभी को मालूम है और आज के महंगाई के दौर में खर्च की कोई सीमा भी नहीं रहती। उमेश बिष्ट भारी तनाव की स्थिति में आ गए हैं। बेटी के विवाह का कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए वह मित्रों की मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ सामान उधार में उठाना पड़ेगा। कर्मकांड, विवाह संस्कार में लगने वाली धनराशि की व्यवस्था करनी पड़ेगी। ठीक उमेश बिष्ट की जैसी स्थिति अन्य लोगों की भी है। विवाह के लग्न ठीक 15 नवंबर से शुरू होंगे। नवंबर में पहाड़ों में मौसम खुशनुमा रहने के कारण ज्यादातर लोग इसी महीने विवाह करना उचित मानते हैं।
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