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सड़क न बनने पर 25 हजार मतदाता नहीं डालेंगे वोट
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 20 Sep 2016 10:41 PM IST
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स्वीकृत सड़कों का निर्माण न होने पर जिला पंचायत क्षेत्र चौखुना के 25 हजार मतदाता इस बार विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। पिछले दिनों जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री तक लोगों ने अपनी इस भावना को पहुंचा दिया है।
बताया गया है कि क्षेत्र की आठ सड़कों को मंजूरी तो मिली है लेकिन वन भूमि का हस्तांतरण न हो पाने के कारण इनमें से एक में भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने लोगों के कड़े फैसले को देखते हुए आश्वासन दिया है कि सड़कों का निर्माण जल्दी शुरू किया जाएगा।
जिला योजना समिति की सदस्य हेमा नेवलिया ने बताया कि शासन ने चौड़मन्या से कमतोली तक, पातालभुवनेश्वर से मनगढ़ तक, चौड़मन्या से दौलाउप्रेती तक, राईआगर से चचरेत तक, पातालभुवनेश्वर से चौड़मन्या तक, राईचौखूना से पीपली तक, सुकल्याड़ी से पभ्या तक, चौड़मन्या से लेकघाटी तक सड़क निर्माण की मंजूरी तो दे दी लेकिन प्रस्तावित सड़कों के वन भूमि के मामलों का निस्तारण नहीं किया।
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उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 से लोकसभा चुनाव के समय चामा, सिमायल, गनौरा, भूलकी अध्याली के मतदाताओं ने चुनाव बहिष्कार किया था। अभी तक उस इलाके में रोड नहीं बनी है। इस गांवों के लोग विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का भी ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सड़कों को मंजूरी दे तो देती है लेकिन उनमें काम शुरू कराने की कोई पहल नहीं की जाती। इस कारण वर्षों तक यह मामले लटक जाते हैं। इस बार लोग सख्त फैसला ले चुके हैं। यदि ऐसा हुआ तो राजनैतिक दलों के गणित पर असर पड़ जाएगा।
बताया गया है कि क्षेत्र की आठ सड़कों को मंजूरी तो मिली है लेकिन वन भूमि का हस्तांतरण न हो पाने के कारण इनमें से एक में भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने लोगों के कड़े फैसले को देखते हुए आश्वासन दिया है कि सड़कों का निर्माण जल्दी शुरू किया जाएगा।
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जिला योजना समिति की सदस्य हेमा नेवलिया ने बताया कि शासन ने चौड़मन्या से कमतोली तक, पातालभुवनेश्वर से मनगढ़ तक, चौड़मन्या से दौलाउप्रेती तक, राईआगर से चचरेत तक, पातालभुवनेश्वर से चौड़मन्या तक, राईचौखूना से पीपली तक, सुकल्याड़ी से पभ्या तक, चौड़मन्या से लेकघाटी तक सड़क निर्माण की मंजूरी तो दे दी लेकिन प्रस्तावित सड़कों के वन भूमि के मामलों का निस्तारण नहीं किया।
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उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 से लोकसभा चुनाव के समय चामा, सिमायल, गनौरा, भूलकी अध्याली के मतदाताओं ने चुनाव बहिष्कार किया था। अभी तक उस इलाके में रोड नहीं बनी है। इस गांवों के लोग विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का भी ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सड़कों को मंजूरी दे तो देती है लेकिन उनमें काम शुरू कराने की कोई पहल नहीं की जाती। इस कारण वर्षों तक यह मामले लटक जाते हैं। इस बार लोग सख्त फैसला ले चुके हैं। यदि ऐसा हुआ तो राजनैतिक दलों के गणित पर असर पड़ जाएगा।