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पिथौरागढ़ को दो दशक में भी नहीं मिल सकी साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में पहचान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 11:15 PM IST
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The possibilities of adventure tourism are immense, if the government does something
पिथौरागढ़ में उड़ान भरते पैराग्लाइडर। फाइल। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ उत्तराखंड का पहला ऐसा जिला है जहां पर साहसिक पर्यटन की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, स्नो स्कीइंग, ट्रैकिंग और माउंटेन बाइकिंग के लिए मुफीद स्थल उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यहां साहसिक पर्यटन को पंख नहीं लग सके। इसकी मुख्य वजह बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। न तो अच्छी सड़कें हैं और न ही नियमित हवाई सेवा। पर्यटन स्थल तक ठीक से चिह्नित नहीं किए गए हैं, वहां सुविधाएं जुटाना दूर की कौड़ी है। पर्यटन से राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने का दावा करने वाली सरकारें इन सबके चलते पिछले दो दशक में पिथौरागढ़ को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में पहचान नहीं दिला सकीं हैं।
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जिले में हिमालय से निकलने वाली काली नदी, रामगंगा और सरयू रिवर राफ्टिंग के लिए सबसे उपयुक्त नदियां हैं। इन नदियों में 10 से 15 किमी तक राफ्टिंग किसी रोमांच से कम नहीं है। कुमाऊं मंडल विकास निगम हर साल राफ्टिंग का आयोजन कर युवाओं और छात्र-छात्राओं प्रशिक्षण दे रहा है। प्रचार-प्रसार और सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों ने राफ्टिंग के लिए पिथौरागढ़ आने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। राफ्टिंग के शौकीन अधिकतर पर्यटक या तो हिमाचल की ओर मुड़ जाते हैं या फिर ऋषिकेश में ही रुक जाते हैं।
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पैराग्लाइडिंग के लिए भी पूरा जिला मुफीद है। जिला मुख्यालय, मुनस्यारी, डीडीहाट में कई स्थलों से हवा में उड़ान भरना बेहद आसान है। हजारों फीट ऊंची पहाड़ियों से गहरी घाटियों के ऊपर उड़ान भरते हुए मीलों का सफर तय करना किसी रोमांच से कम नहीं है। वर्ष 2016 में पिथौरागढ़ में पैराग्लाइडिंग की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। इस प्रतियोगिता में 18 विदेशियों सहित कुल 60 पायलटों ने भाग लिया था। उसके बाद इस तरह का कोई आयोजन नहीं हो सका।
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हिमनगरी नाम से प्रसिद्ध मुनस्यारी के बेटुलीधार में स्कीइंग होती है। दिसंबर, जनवरी के बाद बर्फबारी होते ही साहसिक खेलों के शौकीन यहां पहुंचते हैं लेकिन औली की तरह सुविधाएं न होने से पर्यटकों की संख्या नगण्य रहती है। पांच वर्ष पूर्व साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में पिथौरागढ़ के खाते में माउंटेन बाइकिंग के रूप में एक और उपलब्धि जुड़ी थी। उत्तराखंड वन विकास निगम की पहल पर यहां पहुंचे विदेशी माउंटेनियरों ने मुनस्यारी में 25 किमी लंबा ट्रेल मार्ग ढूंढा था। इसके बाद कोई गतिविधि न होने से माउंटेन बाइकिंग भी अन्य साहसिक खेलों की तरह हाशिए पर चली गई। एक साथ इतने साहसिक खेलों की गतिविधियां जिले में संचालित होतीं तो हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता।
देश के प्रमुख शहरों में किया जाना चाहिए प्रचार-प्रसार
देश के प्रमुख शहरों सहित दक्षिण भारत में प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। राफ्टिंग के कैंप के लिए जगह चयनित कर स्थायी कैंप बनाए जाए। पैराग्लाइडिंग वाले स्थल विकसित करने की जरूरत है। एयरपोर्ट में एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए परमिट दिया जाना चाहिए। नेपाल के पोखरा और भूटान में एक ही एयरपोर्ट से तमाम गतिविधियां कराई जाती हैं। पर्वतारोहण के लिए रॉक एरिया का चिन्हीकरण होना चाहिए। ट्रैकिंग के लिए परमिट के नियम को शिथिल और फारेस्ट फीस को खत्म किया जाना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में भी पर्यटक हिमाचल को ही जाते रहेंगे।

- अशोक भंडारी, पैराग्लाइडिंग पायलट।
न हवाई सेवा न सुगम सड़क यातायात, कैसे विकसित हो पर्यटन
पिथौरागढ़ साहसिक खेलों का हब है, लेकिन प्रचार-प्रसार न होने और पहुंच मार्ग न होने से पर्यटक दूर हैं। जिले के साहसिक खेल स्थलों को विकसित करने की जरूरत है। मैदानी क्षेत्रों से यहां पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें नहीं हैं। हवाई सुविधा नियमित रहती तो पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता था। कभी केएमवीएन की ओर से राफ्टिंग का प्रशिक्षण दिया जाता था लेकिन अब जिला योजना और बीएडीपी के बजट में भी कटौती की गई है। जब पर्यटक ही नहीं आएगा तो आय कैसे होगी। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। यदि जिले की सड़कों की दशा सुधरे तो पर्यटक यहां जरूर आना चाहेंगे।
- दिनेश गुरुरानी, साहसिक पर्यटन प्रबंधक, केएमवीएन।

पिथौरागढ़ की नदियों में राफ्टिंग का आनंद लेते लोग। फाइल

पिथौरागढ़ की नदियों में राफ्टिंग का आनंद लेते लोग। फाइल- फोटो : PITHORAGARH

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