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Pithoragarh: घायल महिला को स्ट्रेचर से आठ किमी रखकर सड़क तक पहुंचाया, 2014 से आज तक नहीं बन पाई रोड

Fri, 11 Apr 2025 05:28 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 11 Apr 2025 05:28 PM IST
सार

मुनस्यारी का पातों गांव सड़क से नहीं जुड़ा है। यहां के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए आठ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। किसी के बीमार पड़ने या घायल होने पर डोली या स्ट्रेचर पर रखकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

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The injured woman was carried on a stretcher for eight kilometers to reach the road in munsiyari
घायल महिला को स्ट्रेचर से आठ किमी रखकर सड़क तक पहुंचाया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री की घोषणा के 11 साल बाद भी मुनस्यारी का पातों गांव सड़क से नहीं जुड़ा है। यहां के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए आठ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। किसी के बीमार पड़ने या घायल होने पर डोली या स्ट्रेचर पर रखकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे ही मामले में ग्रामीणों ने शुक्रवार को चट्टान से गिरकर घायल हुई महिला को स्ट्रेचर पर रखकर सड़क तक पहुंचाया।

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सीमांत क्षेत्र के पातों गांव निवासी गोमती देवी (55) पत्नी खीम सिंह जानवरों के लिए चारा लेने जंगल गई थीं। इसी बीच वह चट्टान से गिर कर घायल हो गईं। ग्रामीणों ने घायल महिला को स्ट्रेचर के सहारे करीब आठ किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया। वहां से एंबुलेंस 108 की मदद से उन्हें सीएचसी मुनस्यारी लाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद कंधा एवं जांघ की हड्डी में फ्रेक्चर होने के चलते उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। परिजन हेली से उन्हें हल्द्वानी ले जाना चाहते थे लेकिन खराब मौसम के कारण उन्हें जिला चिकित्सालय ले जाया गया।

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बता दें कि 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पातों गांव पहुंचकर सड़क बनाए जाने की घोषणा की थी। सड़क कटिंग का कार्य शुरू भी हुआ लेकिन धीमी रफ्तार के चलते ग्रामीण मरीजों को डोली, स्ट्रेचर के सहारे लाने को मजबूर हैं। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हरीश दरियाल ने कहा कि सड़क निर्माण की गति बेहद धीमी होने के चलते मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से सड़क निर्माण में तेजी लाने का अनुरोध किया है।

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