UK: भारत-चीन व्यापार...रिश्तों में मिठास से पहले खराब होने लगा गुड़-मिश्री, अब तक नहीं मिली चीन की मंजूरी
कोरोना काल के बाद भारत-चीन व्यापार शुरू होने की उम्मीदों पर अनिश्चितता बनी है क्योंकि चीन से अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस बीच गुंजी में रखा करीब 3,000 क्विंटल गुड़ और मिश्री मानसूनी सीलन के कारण खराब होने लगा है, जिससे कारोबारी चिंतित हैं।
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कोरोना काल के बाद इस वर्ष भारत-चीन व्यापार दोबारा शुरू होने की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। व्यापार शुरू करने के लिए अब तक चीन की ओर से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस बीच गुंजी में रखा करीब तीन हजार क्विंटल गुड़ और मिश्री मानसूनी सीलन के कारण खराब होने लगा है जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। स्थिति यह है कि 28 से अधिक व्यापारी गुंजी से वापस लौट चुके हैं।
वर्ष 1992 में तकलाकोट (पुरंग) मंडी के माध्यम से शुरू हुआ भारत-चीन व्यापार कोरोना महामारी तक नियमित रूप से संचालित होता रहा। महामारी के दौरान व्यापार बंद हो गया था। इस वर्ष दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद व्यापार फिर शुरू होने की उम्मीद जगी। भारत की ओर से ट्रेड पास जारी होने के बाद व्यापारी गुड़, मिश्री और अन्य सामान गुंजी तक पहुंचा चुके थे।
पिछले दिनों में चीनी अधिकारियों ने तकलाकोट (पुरंग) मंडी में भारतीय व्यापारियों के लिए पर्याप्त दुकानों और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव बताते हुए व्यापार शुरू करने में असमर्थता जताई। उनका कहना है कि आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही व्यापार शुरू किया जाएगा।
व्यापार शुरू होने की तिथि तय नहीं होने और लगातार हो रही बारिश के कारण गुंजी में रखा गुड़ और मिश्री सीलन की चपेट में आकर खराब होने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि निर्धारित तिथि 27 जून तक व्यापार शुरू हो गया होता तो अब तक 55 प्रतिशत से अधिक सामान बिक चुका होता। उनका कहना है कि चीन के रवैये से इस वर्ष व्यापार शुरू होने को लेकर संशय गहरा गया है।
नेपाल के व्यापारियों को अनुमति, भारतीय अब भी इंतजार में
भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली ने कहा कि चीन ने नेपाल के व्यापारियों को तिब्बत की पुरंग मंडी में कारोबार की अनुमति दे दी है, जबकि भारतीय व्यापारियों को अब तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। इसे उन्होंने भारतीय व्यापारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया बताया।
पुरंग के अधिकारियों से भारतीय व्यापारियों को बगैर सामान के तिब्बत में जाने की इजाजत देने का अनुरोध किया गया है ताकि वे वहां जाकर मौजूदा सुविधाओं का जायजा ले सकें। जल्द ही इसका जवाब मिलने की उम्मीद है। -आशीष जोशी, एसडीएम, धारचूला
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पहली बार चीन का ऐसा व्यवहार देखा गया है। छह महीने पहले दोनों सरकारों के बीच व्यापार शुरू करने की योजना तय हो गई थी तो चीन की तरफ से समय पर आवश्यक सुविधाएं जुटा लेनी चाहिए थी। व्यापार शुरू न होने से भारतीय कारोबारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। -बीडी कसनियाल, वरिष्ठ पत्रकार, पिथौरागढ़