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जिले के स्थापना दिवस पर किया पौधरोपण
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 24 Feb 2017 10:34 PM IST
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पिथौरागढ़ जिले की स्थापना के 57 वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को यहां घंटाकरण स्थित संपूर्णानंद पार्क में प्रशासन के अधिकारियों और स्वयंसेवी संगठनों के लोगों ने पौधरोपण किया। इन वर्षों में हरियाली के कम होने पर चिंता व्यक्त की गई। कहा गया कि सभी को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करना चाहिए।
24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा से अलग कर पिथौरागढ़ जिले का गठन हुआ था। इन वर्षों में ढांचागत सुविधाओं का विस्तार तो हुआ, लेकिन समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि गांव लगातार खाली हो रहे हैं और शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। इस कारण शहरों और कस्बों में असुविधाएं ज्यादा बढ़ रही हैं। आज जिले का हर कस्बा, नगर पेयजल, जाम, गंदगी जैसी समस्याओं से घिर रहा है, जबकि गांव मानवविहीन होते जा रहे हैं। कहा गया कि जिले का गठन सीमांत के विकास के लिए किया गया था। समय के साथ जिला गठन की इस मूल भावना को लोग छोड़ते गए।
जिले के लोगों से अपील की गई कि वह विकास की सोच रखें। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दें। गांवों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के साथ साथ लोगों को भी सोचना होगा। शहरों में शिक्षा का स्तर तो बढ़ा, लेकिन गांवों में बच्चों के अभाव में विद्यालय बंद होते जा रहे हैं।
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57 वर्ष के इस जिले के साथ कई ऐसी विडंबनाएं जुड़ रही हैं जिनका समाधान काफी कठिन है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाए ज्यादा गिरावट आई है। सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था से लोगों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के प्रयासों से विकास के काम बहुत हुए हैं ,लेकिन जनता को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।
इस मौके पर अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर, हरित सोर संगठन के संयोजक ललित मोहन कापड़ी, सूचना अधिकारी गिरजा जोशी, मोहन लाल वर्मा, किशन खड़ायत, रवि वल्दिया, राजू मेहता, नंदन मेहता समेत तमाम लोग थे।
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24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा से अलग कर पिथौरागढ़ जिले का गठन हुआ था। इन वर्षों में ढांचागत सुविधाओं का विस्तार तो हुआ, लेकिन समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि गांव लगातार खाली हो रहे हैं और शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। इस कारण शहरों और कस्बों में असुविधाएं ज्यादा बढ़ रही हैं। आज जिले का हर कस्बा, नगर पेयजल, जाम, गंदगी जैसी समस्याओं से घिर रहा है, जबकि गांव मानवविहीन होते जा रहे हैं। कहा गया कि जिले का गठन सीमांत के विकास के लिए किया गया था। समय के साथ जिला गठन की इस मूल भावना को लोग छोड़ते गए।
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जिले के लोगों से अपील की गई कि वह विकास की सोच रखें। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दें। गांवों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के साथ साथ लोगों को भी सोचना होगा। शहरों में शिक्षा का स्तर तो बढ़ा, लेकिन गांवों में बच्चों के अभाव में विद्यालय बंद होते जा रहे हैं।
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57 वर्ष के इस जिले के साथ कई ऐसी विडंबनाएं जुड़ रही हैं जिनका समाधान काफी कठिन है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाए ज्यादा गिरावट आई है। सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था से लोगों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के प्रयासों से विकास के काम बहुत हुए हैं ,लेकिन जनता को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।
इस मौके पर अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर, हरित सोर संगठन के संयोजक ललित मोहन कापड़ी, सूचना अधिकारी गिरजा जोशी, मोहन लाल वर्मा, किशन खड़ायत, रवि वल्दिया, राजू मेहता, नंदन मेहता समेत तमाम लोग थे।