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Pithoragarh News: आदि कैलाश और मानसरोवर यात्रा मार्ग पर धारचूला सीएचसी खुद बीमार
Wed, 24 Jun 2026 10:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:48 PM IST
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संयुक्त उप जिला अस्पताल, धारचूला। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़)। आदि कैलाश, मानसरोवर यात्रा मार्ग और नेपाल सीमा पर संचालित संयुक्त उप जिला अस्पताल धारचूला विशेषज्ञों की कमी से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और यात्रियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहा है। इस अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो रही है और यह सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
धारचूला आदि कैलाश, मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। यहां संचालित संयुक्त चिकित्सालय पर यात्रियों, पर्यटकों के साथ ही क्षेत्र की 50 हजार से अधिक की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। वहीं नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के नाम पर यहां सिर्फ ईएनटी सर्जन, हड्डी रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। फिजिशियन, सर्जन, बाल और महिला रोग जैसे प्रमुख विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों, गर्भवतियों और यात्रियों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। मजबूरन अस्पताल प्रबंधन मरीजों और गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर रहा है। ऐसे में उन्हें इलाज के लिए 90 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
आपात स्थिति में मरीजों और गर्भवतियों को समय पर हायर सेंटर पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। विशेषज्ञों की नियुक्ति न होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। वहीं पर्यटकों का भी कहना है कि आदि कैलाश और मानसरोवर यात्रा के दौरान हृदय, सांस सहित अन्य दिक्कत पैदा होती है। ऐसे में इस अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञों की तैनाती जरूरी है।
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इस यात्रा सीजन में दिल का दौरा पड़ने से तीन यात्रियों की हो चुकी है मौत
आदि कैलाश यात्रा सीजन चरम पर है। रोजाना 700 से अधिक यात्री पहुंच रहे हैं। जल्द ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी शुरू होगी। यात्रा मार्ग पर संचालित प्रमुख संयुक्त उप जिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों की तैनाती न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञ न होने से यात्रियों की जान भी आफत में पड़ रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सीजन में दिल का दौरा पड़ने से तीन आदि कैलाश यात्रियों की मौत हो चुकी है। संयुक्त चिकित्सालय में विशेषज्ञ न होने से यात्रियों को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उन्हें काल के गाल में समाना पड़ा।
बोले लोग
यात्रा मार्ग पर संचालित संयुक्त चिकित्सालय में विशेषज्ञों की तैनाती न होना गंभीर है। विशेषज्ञ न होने से यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। - भूपेंद्र थापा, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, धारचूला
अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में संचालित यह अस्पताल महत्वपूर्ण है। आदि कैलाश और कैलाश मानसरोवर यात्री भी इसी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। विशेषज्ञों की कमी से यहां बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। - गुलाब सिंह, धारचूला
संयुक्त चिकित्सालय में न तो बच्चों को ना ही महिलाओं को इलाज मिल रहा है। प्रमुख विशेषज्ञ न होने से यह अस्पताल सिर्फ हायर सेंटर बनकर रह गया है। इसके बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे हो रहे हैं। - भूपाल सिंह रावल, अध्यक्ष, गौरव सेनानी कल्याण समिति, धारचूला
यात्रा मार्ग पर संचालित इस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग और सरकार गंभीर नहीं है। मामूली रोग का इलाज तो यहां मिलता है। गंभीर हालत में रेफर मरीजों के लिए समय पर हायर सेंटर पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। - शकुंतला गर्ब्याल, बीडीसी सदस्य, धारचूला
कोट
संयुक्त उप जिला चिकित्सालय धारचूला में विशेषज्ञों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को दी गई है। शासन स्तर पर ही विशेषज्ञों की तैनाती संभव है। -डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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धारचूला आदि कैलाश, मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। यहां संचालित संयुक्त चिकित्सालय पर यात्रियों, पर्यटकों के साथ ही क्षेत्र की 50 हजार से अधिक की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। वहीं नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के नाम पर यहां सिर्फ ईएनटी सर्जन, हड्डी रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। फिजिशियन, सर्जन, बाल और महिला रोग जैसे प्रमुख विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों, गर्भवतियों और यात्रियों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। मजबूरन अस्पताल प्रबंधन मरीजों और गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर रहा है। ऐसे में उन्हें इलाज के लिए 90 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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आपात स्थिति में मरीजों और गर्भवतियों को समय पर हायर सेंटर पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। विशेषज्ञों की नियुक्ति न होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। वहीं पर्यटकों का भी कहना है कि आदि कैलाश और मानसरोवर यात्रा के दौरान हृदय, सांस सहित अन्य दिक्कत पैदा होती है। ऐसे में इस अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञों की तैनाती जरूरी है।
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इस यात्रा सीजन में दिल का दौरा पड़ने से तीन यात्रियों की हो चुकी है मौत
आदि कैलाश यात्रा सीजन चरम पर है। रोजाना 700 से अधिक यात्री पहुंच रहे हैं। जल्द ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी शुरू होगी। यात्रा मार्ग पर संचालित प्रमुख संयुक्त उप जिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों की तैनाती न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञ न होने से यात्रियों की जान भी आफत में पड़ रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सीजन में दिल का दौरा पड़ने से तीन आदि कैलाश यात्रियों की मौत हो चुकी है। संयुक्त चिकित्सालय में विशेषज्ञ न होने से यात्रियों को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उन्हें काल के गाल में समाना पड़ा।
बोले लोग
यात्रा मार्ग पर संचालित संयुक्त चिकित्सालय में विशेषज्ञों की तैनाती न होना गंभीर है। विशेषज्ञ न होने से यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। - भूपेंद्र थापा, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, धारचूला
अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में संचालित यह अस्पताल महत्वपूर्ण है। आदि कैलाश और कैलाश मानसरोवर यात्री भी इसी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। विशेषज्ञों की कमी से यहां बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। - गुलाब सिंह, धारचूला
संयुक्त चिकित्सालय में न तो बच्चों को ना ही महिलाओं को इलाज मिल रहा है। प्रमुख विशेषज्ञ न होने से यह अस्पताल सिर्फ हायर सेंटर बनकर रह गया है। इसके बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे हो रहे हैं। - भूपाल सिंह रावल, अध्यक्ष, गौरव सेनानी कल्याण समिति, धारचूला
यात्रा मार्ग पर संचालित इस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग और सरकार गंभीर नहीं है। मामूली रोग का इलाज तो यहां मिलता है। गंभीर हालत में रेफर मरीजों के लिए समय पर हायर सेंटर पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। - शकुंतला गर्ब्याल, बीडीसी सदस्य, धारचूला
कोट
संयुक्त उप जिला चिकित्सालय धारचूला में विशेषज्ञों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को दी गई है। शासन स्तर पर ही विशेषज्ञों की तैनाती संभव है। -डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़