{"_id":"581f5c1a4f1c1bf57eb3746b","slug":"the-death-of-the-grandmother-grandson-of-wasp-s-bite","type":"story","status":"publish","title_hn":"ततैयों के काटने से दादी-पोते की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ततैयों के काटने से दादी-पोते की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बैतड़ी/झूलाघाट
Updated Sun, 06 Nov 2016 10:06 PM IST
विज्ञापन
ततैया
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल के बैतड़ी जिले में ततैयों के झुंड के हमले में दादी और पोते की मौके पर ही मौत हो गई। घटना जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर हुई। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से यह मौतें हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही जिला मुख्यालय से नेपाल पुलिस की टीम मौके पर रवाना हो गई है।
विज्ञापन
बैतड़ी जिला प्रहरी कार्यालय से मिली सूचना के अनुसार थलकाड़ा क्षेत्र के वार्ड संख्या 8 में जोगीचिउर गांव में शनिवार को यह घटना हुई। वहां धन बहादुर साउद की माता पुंपा देवी (68) और पुत्र दीपक साउद (12) अपने मामा के घर से लौट रहे थे। बजड़ा के पास च्यूरे के पेड़ पर छत्ते में एकत्र ततैयों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। ततैयों ने उनको काट दिया। एकांत जंगल में हुई इस घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। जब यह दोनों रात तक घर नहीं पहुंचे तो खोजबीन शुरू की गई। उनके शव ततैयों के छत्ते के पास ही पड़े थे।
विज्ञापन
बैतड़ी के पुलिस अधीक्षक बाल नर सिंह राणा ने सूचना मिलते ही नेपाल पुलिस की एक टीम घटना स्थल के लिए रवाना कर दी है। नेपाल के पश्चिमांचल के जिले में सैकड़ों गांव आज भी सड़क सेवा से वंचित हैं। इसी कारण इन गांवों में आज भी जरूरी सेवाओं का अभाव हैं। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से कई लोगों की अकाल मौत हो जाती है। बताया जाता है कि नेपाल के जंगलों में ततैयों की संख्या बहुत अधिक है। यह अपेक्षाकृत ज्यादा जहरीले होते हैं।
विज्ञापन