{"_id":"5cb369dfbdec2214435fcfb8","slug":"surar-malu-ra-jhumka-cloud-water-sara","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरर मालू रा झुमका बादल पानी सरारा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरर मालू रा झुमका बादल पानी सरारा...
Sun, 14 Apr 2019 10:42 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , थल (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , थल (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sun, 14 Apr 2019 10:42 PM IST
विज्ञापन
थल मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
- फोटो : पिथौरागढ़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थल के ऐतिहासिक मेले में पहली रात मां सुनैयना सांस्कृतिक समिति और पुष्कर महर एंड पार्टी के नाम रही। सांस्कृतिक दलों ने बेहतरीन कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
सांस्कृतिक दलों ने न्यौली, छपेली, चांचरी, झोड़ा की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोक दलों ने ‘सरर मालू रा झुमका बादल पानी सरारा’ गीत की प्रस्तुति दी तो लोग खड़े होकर नाचने लगे। स्टार नाइट के तहत कुमाऊंनी गायक जीतेंद्र तोमक्याल ने ‘संगीता मैं फोन करुल, तू नी उठाली मैं चिट्ठी भेजूल’, सुरेश प्रसाद सुरीला ने ‘यो डाना को पार, देखींछ न्यार-न्यार’, संदीप लोहिया ने तेरी लवली अनवार, चंद्रकला देऊपा ने ‘ओ चंदू डरैबर’, मनोहर आर्या ने ‘डमरू बजै दिन रात’, सीमा विश्वकर्मा, चंद्र मोहन पांगती ने ‘पहाड़क ठंडो पाणी, राघव कुमार ने गीत गाकर समा बांध दिया।
मुख्य अतिथि पर्वतीय महापरिषद लखनऊ के महासचिव गणेश चंद्र जोशी, विशिष्ट अतिथि मुंबई कौथिंग के संयोजक जगजीवन सिंह कन्याल ने आयोजन की सराहना की। कहा कि तीन दिनी मेले से संस्कृति संरक्षण में मदद मिलेगी। मेला समिति के अध्यक्ष देवराज सत्याल, व्यवस्थापक दिनेश चंद्र पाठक, सचिव अर्जुन सिंह रावत, कोषाध्यक्ष प्रवीण जंगपांगी अतिथि को सम्मानित किया। संचालन कृष्ण गोपाल पंत, हिमाद्री बृजवाल, नरेश जोशी ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांस्कृतिक दलों ने न्यौली, छपेली, चांचरी, झोड़ा की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोक दलों ने ‘सरर मालू रा झुमका बादल पानी सरारा’ गीत की प्रस्तुति दी तो लोग खड़े होकर नाचने लगे। स्टार नाइट के तहत कुमाऊंनी गायक जीतेंद्र तोमक्याल ने ‘संगीता मैं फोन करुल, तू नी उठाली मैं चिट्ठी भेजूल’, सुरेश प्रसाद सुरीला ने ‘यो डाना को पार, देखींछ न्यार-न्यार’, संदीप लोहिया ने तेरी लवली अनवार, चंद्रकला देऊपा ने ‘ओ चंदू डरैबर’, मनोहर आर्या ने ‘डमरू बजै दिन रात’, सीमा विश्वकर्मा, चंद्र मोहन पांगती ने ‘पहाड़क ठंडो पाणी, राघव कुमार ने गीत गाकर समा बांध दिया।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि पर्वतीय महापरिषद लखनऊ के महासचिव गणेश चंद्र जोशी, विशिष्ट अतिथि मुंबई कौथिंग के संयोजक जगजीवन सिंह कन्याल ने आयोजन की सराहना की। कहा कि तीन दिनी मेले से संस्कृति संरक्षण में मदद मिलेगी। मेला समिति के अध्यक्ष देवराज सत्याल, व्यवस्थापक दिनेश चंद्र पाठक, सचिव अर्जुन सिंह रावत, कोषाध्यक्ष प्रवीण जंगपांगी अतिथि को सम्मानित किया। संचालन कृष्ण गोपाल पंत, हिमाद्री बृजवाल, नरेश जोशी ने किया।
विज्ञापन