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Pithoragarh News: खुले आसमान के नीचे पढ़ाई, बारिश होते ही छुट्टी करने की मजबूरी

Wed, 20 Aug 2025 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Wed, 20 Aug 2025 10:43 PM IST
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Studying under the open sky, forced to leave as soon as it rains
जीआईसी खतेड़ा का जर्जर भवन। स्रोत:अ​भिभावक।
नाचनी (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले में विद्यालय भवनों की बदहाली पूरी शिक्षा व्यवस्था के साथ ही शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। नाचनी क्षेत्र का जीआईसी खतेड़ा इसका प्रमाण है। जिस विद्यालय को स्वतंत्रता सेनानी के नाम से पहचान दी गई, सिस्टम उसकी तस्वीर नहीं बदल सका। इस विद्यालय भवन में सिर्फ 33 साल में ही विद्यार्थियों का साथ छोड़ दिया है। जर्जर विद्यालय के कक्षों में विद्यार्थियों को बैठाना नामुमकिन है और खुले आसमान के नीचे पढ़ाना मजबूरी है। बारिश होते ही छुट्टी कर विद्यार्थियों को घर भेजना जरूरी है।
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खतेड़ा हाईस्कूल का भवन वर्ष 1992 में बना। वर्ष 2007 में इसका उच्चीकरण कर इसे इंटर कॉलेज के रूप में संचालित किया गया। उच्चीकरण के बाद इस विद्यालय को क्षेत्र के महान स्वतंत्रता सेनानी स्व. पुरुषोत्तम जोशी के नाम से पहचान तो दी गई लेकिन इसकी दयनीय हालत नहीं सुधारी जा सकी। विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है। छत और दीवारों पर दरारें पड़ने से इसके गिरने का खतरा है। छत पर पड़ी दरारों से पानी टपकने से कक्ष तालाब में तब्दील हो रहे हैं।
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विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन ने इन कक्षों को बंद कर खुले आसमान के नीचे पढ़ाई की व्यवस्था करनी पड़ी है। मौसम ने साथ दिया तो बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ पाते हैं। बारिश होते ही विद्यार्थियों की छुट्टी कर इन्हें घर भेजना मजबूरी बना हुआ है।
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अभिभावकों की मजबूरी
जीआईसी खतेड़ा में सिनी, चामा, खतेड़ा, नापड़ और रिंगोनिया पांच ग्राम पंचायतों के 80 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। जर्जर विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है लेकिन अभिभावकों के लिए यह खतरा उठाना मजबूरी है। ऐसा इसलिए कि यदि विद्यार्थियों को यहां से अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया तो उन्हें जीआईसी नाचनी पहुंचने के लिए 18 और जीआईसी डीडीहाट पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। इनके अलावा आसपास में कोई अन्य विद्यालय संचालित नहीं हैं।
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ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव सरकारी फाइलों में सिमटा
जीआईसी खतेड़ा का संचालन हाईस्कूल के लिए बने भवन में हो रहा है। सिर्फ छह कक्षों में इंटर तक की 11 कक्षाओं का संचालन हो रहा था। इंटर कॉलेज के लिए नए भवन का निर्माण नहीं हुआ और पुराना भवन भी विद्यार्थियों का साथ छोड़ गया है। विभाग भी मानता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए इसका ध्वस्तीकरण कर नवनिर्माण जरूरी है। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया है जो सरकारी फाइलों में सिमटकर रह गया है।
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बोले अभिभावक
लंबे समय से विद्यालय का नवनिर्माण करने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुरक्षा को देखते हुए बारिश में बच्चों की छुट्टी करना जरूरी है। ऐसे में इनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। - गोकुल गिरी, पीटीए अध्यक्ष, जीआईसी खतेड़ा
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सरकारी शिक्षा को बेहतर करने के सभी दावे फेल हैं। हमारे क्षेत्र के एकमात्र विद्यालय की सुध नहीं ली जा रही है। कक्षों में बच्चों को बैठाना खतरे से खाली नहीं है। नवनिर्माण की मांग कर अभिभावक थक गए हैं लेकिन शासन-प्रशासन तक हमारी आवाज नहीं पहुंच रही है। - दीपा चुफाल, बीडीसी सदस्य, नापड़

कोट
जर्जर और बदहाल विद्यालयों के सुधारीकरण और नवनिर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इस पर काम शुरू होगा। जीआईसी खतेड़ा का भी प्रस्ताव भेजा गया है। - हरक राम कोहली, सीईओ, पिथौरागढ़


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