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आपदा से विद्यालयों की पढ़ाई पर असर
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
Updated Mon, 11 Jul 2016 10:48 PM IST
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GIC Singali Bstdi staying in relief camps set up in the affected disaster.
- फोटो : अमर उजाला
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बस्तड़ी और उड़मा के आपदा प्रभावितों को राजकीय इंटर कालेज और प्राथमिक पाठशाला में टिकाए जाने से दोनों विद्यालयों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। प्राथमिक पाठशाला उड़मा में तो अभी तक एक जुलाई के बाद विद्यालय शुरू ही नहीं हो पाया है। जबकि जीआईसी में विषम परिस्थितियों में ही विद्यालय खोला तो गया है लेकिन पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। जीआईसी के दो कमरे आपदा प्रभावितों को दिए गए है।
जीआईसी के प्रधानाचार्य जनार्दन अवस्थी ने बताया कि विद्यालय के फील्ड के एक कोने में आपदा प्रभावितों के दो टेंट लगाए गए है। जबकि एक बड़ा हाल आपदा पीड़ितों को दिया गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय के दो कमरे आपदा के दौरान ध्वस्त हुए है इस कारण उन में बच्चों को बैठा पाना संभव नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि विद्यालय के पठन-पाठन पर असर पड़ रहा है। एक हॉल में आपदा पीड़ितों के रुके होने के कारण बच्चों का ध्यान हर वक्त उसी तरफ जाता है।
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प्राथमिक पाठशाला की प्रधानाध्यापक मंजू पोखरिया ने बताया कि विद्यालय में एक जुलाई से अब तक पढ़ाई नहीं हो पाई है। वह रोज विद्यालय तो पहुंच रही हैं लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई कमरा खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि विद्यालय के पास ही कुछ टेंट लगाए गए है लेकिन आपदा प्रभावित उनमें जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
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दोनों विद्यालयों में इस समय विषम स्थिति पैदा हो गई है। मानवीय आधार पर आपदा प्रभावितों को वहां से फिलहाल वहां से हटने के लिए भी नहीं कहा जा सकता है। जीआईसी सिंघाली और प्राथमिक विद्यालय सिंघाली बस्तड़ी गांव से मात्र दो किमी की दूरी पर है। प्रशासन ने आपदा के तुरंत बाद सभी पीड़ितों को इन विद्यालयों में पहुंचा दिया था। यदि जल्दी प्रभावितों के लए स्थायी रूप से आवास की व्यवस्था नहीं होती तो दोनों विद्यालयों की पढ़ाई में असर पड़ेगा।