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प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करें विद्यार्थी : प्रो. बिष्ट
Sat, 10 May 2025 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 10 May 2025 11:09 PM IST
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। हिमालयन ग्राम विकास समिति में सीएनआर राव फाउंडेशन और यूकॉस्ट की ओर से आयोजित साइंस आउटरीच कार्यक्रम के दूसरे दिन छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की जानकारी दी गई। मुख्य वक्ता सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट और जेएनसीएएसआर बेंगलुरु से आए भौतिक विज्ञानी प्रो. उमेश वाघमारे रहे।
प्रो. बिष्ट ने कहा विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वह अपने आसपास की प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करें। कहा कि विश्व विख्यात वैज्ञानिक हिमालय को दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला मानते हैं। अगर हम हिमालय को समझ पाते हैं तो हमारा दृष्टिकोण वैज्ञानिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि यही वैज्ञानिक बनने की प्रथम सीढ़ी हैं।
प्रो. वाघमारे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विभिन्न विषयों में शोध कार्य एवं चिकित्सा विज्ञान में हो रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के डॉ. महेंद्र राणा ने दवाइयों को बनाने, अनुसंधान और मार्केटिंग के बारे में बताया। उन्होंने जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में अंतर समझाते हुए फार्मेसी के क्षेत्र में भविष्य बनाने के टिप्स दिए। बेंगलुरु से पहुंची डॉ. जयश्री सनवाल भट्ट ने गुफा बनने की प्रक्रिया और भू वैज्ञानिकों के शोधों के बारे में बताया।
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डॉ. दिव्या भूटानी ने नैनो पार्टिकल्स, रिडॉक्स अभिक्रिया, पानी से हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन बनाने की विधि बताई। प्रो. पीएस महर ने वर्तमान में गिरते हुए भूजल के कारण भविष्य में होने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। समन्वयक प्रो. बीडी लखचौरा ने अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट, कैलाश चंद्र पंत, बेड़ीनाग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विश्व मोहन पांडे, डॉ. जेएन पंत, डॉ. बीएस बिष्ट, दिनेश भट्ट, डॉ. प्रभाकर जोशी, मोहन धामी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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प्रो. बिष्ट ने कहा विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वह अपने आसपास की प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करें। कहा कि विश्व विख्यात वैज्ञानिक हिमालय को दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला मानते हैं। अगर हम हिमालय को समझ पाते हैं तो हमारा दृष्टिकोण वैज्ञानिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि यही वैज्ञानिक बनने की प्रथम सीढ़ी हैं।
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प्रो. वाघमारे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विभिन्न विषयों में शोध कार्य एवं चिकित्सा विज्ञान में हो रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के डॉ. महेंद्र राणा ने दवाइयों को बनाने, अनुसंधान और मार्केटिंग के बारे में बताया। उन्होंने जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में अंतर समझाते हुए फार्मेसी के क्षेत्र में भविष्य बनाने के टिप्स दिए। बेंगलुरु से पहुंची डॉ. जयश्री सनवाल भट्ट ने गुफा बनने की प्रक्रिया और भू वैज्ञानिकों के शोधों के बारे में बताया।
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डॉ. दिव्या भूटानी ने नैनो पार्टिकल्स, रिडॉक्स अभिक्रिया, पानी से हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन बनाने की विधि बताई। प्रो. पीएस महर ने वर्तमान में गिरते हुए भूजल के कारण भविष्य में होने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। समन्वयक प्रो. बीडी लखचौरा ने अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट, कैलाश चंद्र पंत, बेड़ीनाग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विश्व मोहन पांडे, डॉ. जेएन पंत, डॉ. बीएस बिष्ट, दिनेश भट्ट, डॉ. प्रभाकर जोशी, मोहन धामी समेत कई लोग मौजूद रहे।