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बदहाल स्वास्थ सुविधाओं को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने दिया धरना
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बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुनस्यारी में धरना देते राज्य आंदोलनकारी।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। सीमांत पिथौरागढ़ जिले के स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल चिकित्सा सुविधा में सुधार की मांग को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने क्वीटी और मुनस्यारी अस्पतालों के बाहर धरना दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर राज्य की स्थापना की गई थी बीस साल भी वह जनता को हासिल नहीं हुआ है।
राज्य आंदोलनकारी मोहन पाठक के नेतृत्व में राज्य आंदोलनकारियों ने सीएचसी मुनस्यारी के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। इस अवसर वक्ताओं ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस उद्देश्य को लेकर अलग राज्य की स्थापना की गई थी वह आज भी पूरा नहीं हुआ। यह विडंबना ही है कि उन्हें राज्य स्थापना के दिन भी धरने पर बैठने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
कहा कि कुमाऊं के अस्पतालों की हालत बदतर हो चुकी है। कई अस्पतालों में तकनीशियन नहीं हैं। एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीनें कमरों में बंद पड़ी हैं। खून जांच तक की सुविधा नहीं है। मामूली उपचार के लिए भी मरीजों को पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ रही है। सीमांत में संचार सुविधा से अभी भी लोग वंचित हैं। सड़कों में गड्ढे बने हुए हैं। लोगों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जो शहीदों ने सपने देखे थे यह सपने आखिर कब पूरे होंगे। सरकारों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए।
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राज्य आंदोलनकारी मोहन पाठक के नेतृत्व में राज्य आंदोलनकारियों ने सीएचसी मुनस्यारी के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। इस अवसर वक्ताओं ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस उद्देश्य को लेकर अलग राज्य की स्थापना की गई थी वह आज भी पूरा नहीं हुआ। यह विडंबना ही है कि उन्हें राज्य स्थापना के दिन भी धरने पर बैठने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
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कहा कि कुमाऊं के अस्पतालों की हालत बदतर हो चुकी है। कई अस्पतालों में तकनीशियन नहीं हैं। एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीनें कमरों में बंद पड़ी हैं। खून जांच तक की सुविधा नहीं है। मामूली उपचार के लिए भी मरीजों को पिथौरागढ़ की दौड़ लगानी पड़ रही है। सीमांत में संचार सुविधा से अभी भी लोग वंचित हैं। सड़कों में गड्ढे बने हुए हैं। लोगों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जो शहीदों ने सपने देखे थे यह सपने आखिर कब पूरे होंगे। सरकारों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए।
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