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मानसून की दस्तक के साथ ही रोपाई शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:34 PM IST
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थल के धामीगांव में धान की रोपाई लगाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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मानसून की दस्तक के साथ ही किसानों के चेहरे भी खिल गए हैं। पहाड़ के कई गांवों में लोग धान की रोपाई के लिए बारिश का इंतजार करते हैं। जब अच्छी बारिश हो जाए तो खेतों में पानी भर जाता है। आसपास बहने वाले नालों में पानी आ जाता है। किसानों के लिए इससे अच्छा समय और कुछ नहीं होता। शनिवार की रात से यहां लगातार बारिश हो रही है। रविवार को सुबह से ही हो रही मध्यम स्तर की बारिश का फायदा उठाते हुए धामीगांव के गिरीश चंद्र भट्ट ने अपने दो नाली खेत में पूसा बासमती धान की रोपाई शुरू कर दी।
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रोपाई के समय कुछ वर्ष पहले तक पहाड़ पर हुड़कीबौल का गायन भी होता था। पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के कारण यह परंपरा अब बंद हो गई है। रोपाई को लोग एक उत्सव की तरह आयोजित करते हैं। धामीगांव में रोपाई के समय पूरा गांव एकत्र हो गया। महिलाओं ने धान के पौधों को रोपा। गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि पिछले साल उन्होंने एक नाली जमीन पर बासमती की रोपाई लगाई थी। उत्पादन अच्छा होने पर इस साल इसे दो नाली में रोप दिया गया है। यदि मौसम ने साथ दिया और इस बार उत्पादन ठीक हुआ तो अगले साल दस नाली जमीन पर बासमती की रोपाई लगाएंगे। गांव के अन्य लोग भी अपने खाली पड़े खेतों पर बासमती की रोपाई लगाने की तैयारी में हैं।
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थल की गर्म घाटी में धान की पैदावार काफी अच्छी होती है। कई परिवार तो चावलों की बिक्री भी करते हैं। बासमती चावल की बाजार में मांग अच्छी है। पहाड़ में पैदा होने वाले बासमती का स्वाद और बेहतरीन होता है। गिरीश चंद्र भट्ट का कहना है कि यदि पहाड़ के किसान अपने खेतों में बासमती उगाना शुरू कर दें तो उनका आर्थिक स्तर बहुत जल्दी ऊंचा उठ जाएगा।
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