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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Simsia save potable water Naule

पीने लायक नहीं बचा चिमसियानौले का पानी

Tue, 12 Jan 2016 09:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़ Updated Tue, 12 Jan 2016 09:41 PM IST
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चिमसियानौला का पानी आज से 15 वर्ष पूर्व तक बेहद स्वादिष्ट माना जाता था। यह नौला चिमसियानौला मोहल्ले के करीब 4000 लोगों की प्यास बुझाता था। लोग पेयजल के लिए इसी नौले के पानी का उपयोग करते थे। नलों में आने वाले पानी की शुद्धता पर उनको यकीन नहीं रहता था। शहरीकरण का दौर शुरू हुआ। इस नौले के आसपास और उससे सटकर आवासीय और व्यावसायिक भवन बन गए। कुछ समय बाद लोगों को लगा कि पानी का रंग बदलने लगा है। उससे दुर्गंध आने लगी। जब नगरपालिका ने इसकी जांच कराई तो पता चला कि इस प्राचीन नौले के स्रोत में सीवर का पानी मिल गया है। सावधानी के तौर पर वहां एक बोर्ड लगाना पड़ा। जिसमें यह चेतावनी लिखी गई कि नौले के पानी को पीने के उपयोग में न लाएं। आज भी चिमसियानौला है। इसके नाम से ही एक मोहल्ले का नाम पड़ा है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यह नौला अब किसी काम का नहीं है। पालिका ने नौले की सुरक्षा और संरक्षण के उपाय भी किए लेकिन पानी फिर भी साफ नहीं हो पाया। लोग इस नौले के पानी का उपयोग अब कपड़े धोने, क्यारियों की सिंचाई के लिए करते हैं। इसके पानी से स्नान भी नहीं किया जाता।
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सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की जाए
पिथौरागढ़। चिमसियानौला निवासी राकेश जोशी कहते हैं कि नौले हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। विवाह के बाद दुल्हन को अनिवार्य रूप से प्राकृतिक जलस्रोत पर ले जाने की परंपरा रही है। जब नौले ही नहीं रहेंगे तो यह हमारी सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी खतरा है। इनके संरक्षण के उपाय लिए जाने चाहिए।
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इस दशा के लिए सभी जिम्मेदार
पिथौरागढ़। चिमसियानौला निवासी मनोज जोशी कहते हैं कि प्राकृतिक स्रोतों की खराब दशा के लिए सभी जिम्मेदार हैं। वह कहते हैं कि प्राकृतिक स्रोत खुद तो प्रदूषित नहीं होता। अब जब स्रोत प्रदूषित हो चुका है तो उनको पुरानी स्थिति में ला पाना संभव नहीं है। लोगों को पहले ही इसका ध्यान देना चाहिए था। फोटो 12 पीटीएच 09 पी (सिंगल)
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अब अभियान चलाने से क्या फायदा
पिथौरागढ़। चिमसियानौला निवासी भगवत प्रसाद पांडे का कहना है कि स्रोतों के संरक्षण के नाम पर अभियान चलाने की बात की जाती है। अब ऐसे अभियानों का कोई लाभ नहीं मिल सकता क्योंकि पानी सिर से ऊपर आ चुका है। यदि लोग 15 साल पहले ऐसा अभियान चलाते तो शायद कुछ स्रोत तो बच जाते।

पालिका को अभी कुछ प्रयास करने चाहिए
पिथौरागढ़। चिमसियानौला निवासी धरम सिंह मेहता का कहना है कि पालिका अभी भी कुछ प्रयास करे तो शायद नौले के प्रदूषण को कम किया जा सकता है। वह कहते हैं कि यदि नौले में सीवर का पानी घुस रहा है तो उसकी निकासी का इंतजाम हो। क्या पता इससे पानी साफ हो जाए। उसकी दुबारा जांच की जाए। फोटो 12 पीटीएच 11 पी (सिंगल)


स्रोतों का प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय
पिथौरागढ़। चिमसियानौला निवासी गणेश दत्त जोशी कहते हैं कि स्रोतों का प्रदूषित होना गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे तो आने वाले समय में गांवों के स्रोत भी सूख जाएंगे। वह कहते हैं कि स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान की जरूरत है। लोग समझेंगे तो शायद स्थिति संभल जाए।

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