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Pithoragarh News: पार्वती सरोवर में 1971 में किया था शिव मंदिर का निर्माण
Sat, 07 Oct 2023 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 07 Oct 2023 11:09 PM IST
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आदि कैलाश में पार्वती सरोवर में स्थित शिव मंदिर में पूजा करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फ
आदि कैलाश (पिथौरागढ़ )। भगवान शिव के सबसे प्राचीन स्थल आदि कैलाश स्थित पार्वती सरोवर में शिव मंदिर का निर्माण सबसे पहले कुटी गांव के लोगों ने वर्ष 1971 में किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अक्तूबर को इसी मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। इसके लिए मंदिर और पार्वती सरोवर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है।
14422 फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में 12 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा प्रस्तावित हैं। उनके दौरे को देखते हुए पार्वती सरोवर के पास स्थित शिव मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। वर्तमान में कैलाश की शोभा बढ़ा रहे इस मंदिर की नींव सबसे पहले वर्ष 1971 में कुटी गांव के तीन लोगों श्रीकृष्ण सिंह कुटियाल, जय सिंह कुटियाल और केदार सिंह कुटियाल ने रखी थी। मंदिर का निर्माण करने के बाद ग्रामीणों ने पूजा अर्चना करना शुरू किया। मंदिर की नींव रखने वाले श्रीकृष्ण ने बताया कि शुरुआत में पत्थरों से छोटा सा मंदिर बनाया गया जिसे स्थानीय भाषा में सफों कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में मंदिर इसी आकार के बनाए जाते हैं। कुटी गांव के रमेश कुटियाल ने बताया कि मंदिर स्थापना के समय देव डांगर दरजी सिंह कुटियाल थे। उन्हीं के निर्देशन में मंदिर का निर्माण हुआ था। पहले गांव के लोग ही इस मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाते थे। अब देश विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं। 12 अक्तूबर को प्रधानमंत्री इस मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। प्रशासन की ओर से इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। शिव मंदिर के साथ ही पूरे पार्वती सरोवर क्षेत्र को विशेष रूप से सजाया जा रहा है।
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भगवान भोलेनाथ का प्रिय स्थल है आदि कैलाश
आदि कैलाश। प्राचीन काल से ही आदि कैलाश का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रहा है। आदि कैलाश को भगवान शिव के सबसे प्राचीन निवास स्थल के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता पार्वती से विवाह करने के लिए जा रहे थे तब इस स्थान पर रुके थे। भगवान शिव माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय के साथ यहां निवास करते थे। इसलिए यह स्थल भोलेनाथ का सबसे प्रिय स्थल माना जाता है।
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14422 फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में 12 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा प्रस्तावित हैं। उनके दौरे को देखते हुए पार्वती सरोवर के पास स्थित शिव मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। वर्तमान में कैलाश की शोभा बढ़ा रहे इस मंदिर की नींव सबसे पहले वर्ष 1971 में कुटी गांव के तीन लोगों श्रीकृष्ण सिंह कुटियाल, जय सिंह कुटियाल और केदार सिंह कुटियाल ने रखी थी। मंदिर का निर्माण करने के बाद ग्रामीणों ने पूजा अर्चना करना शुरू किया। मंदिर की नींव रखने वाले श्रीकृष्ण ने बताया कि शुरुआत में पत्थरों से छोटा सा मंदिर बनाया गया जिसे स्थानीय भाषा में सफों कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में मंदिर इसी आकार के बनाए जाते हैं। कुटी गांव के रमेश कुटियाल ने बताया कि मंदिर स्थापना के समय देव डांगर दरजी सिंह कुटियाल थे। उन्हीं के निर्देशन में मंदिर का निर्माण हुआ था। पहले गांव के लोग ही इस मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाते थे। अब देश विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं। 12 अक्तूबर को प्रधानमंत्री इस मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। प्रशासन की ओर से इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। शिव मंदिर के साथ ही पूरे पार्वती सरोवर क्षेत्र को विशेष रूप से सजाया जा रहा है।
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भगवान भोलेनाथ का प्रिय स्थल है आदि कैलाश
आदि कैलाश। प्राचीन काल से ही आदि कैलाश का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रहा है। आदि कैलाश को भगवान शिव के सबसे प्राचीन निवास स्थल के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता पार्वती से विवाह करने के लिए जा रहे थे तब इस स्थान पर रुके थे। भगवान शिव माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय के साथ यहां निवास करते थे। इसलिए यह स्थल भोलेनाथ का सबसे प्रिय स्थल माना जाता है।