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शौर्य चक्र विजेता के परिजनों को नहीं मिली जमीन
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Fri, 15 Jan 2016 10:13 PM IST
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सरकार और सेना बहादुर जवानों को जमीन देने की घोषणा तो करती है, लेकिन उनको इस जमीन पर कब्जा मिला या नहीं इसकी कभी तहकीकात नहीं होती। यही वजह है कि यहां सातशिलिंग गांव के शौर्य चक्र विजेता स्व. गोपाल सिंह के परिजन पिछले 37 साल से खटीमा के चकरपुर क्षेत्र के अंतर्गत बिलहेरी गांव में जमीन पर कब्जा प्राप्त करने के लिए चक्कर काटते रह गए हैं। शौर्यचक्र विजेता स्व. गोपाल सिंह बेटे भगवान सिंह खड़ायत का कहना है कि खटीमा में आवंटित की गई जमीन पर वहां के कुछ दबंग लोगों का कब्जा है। इस कब्जे को छुड़ाने के लिए प्रशासन भी नाकाम रहा है।
स्व. गोपाल सिंह को राष्ट्रपति ने उनकी मृत्यु के बाद 1976 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनकी पत्नी सीता देवी ने हासिल किया। उसी समय यह घोषणा की गई थी कि शौर्य चक्र विजेता के परिवार को चकरपुर के पास बिलहरी में जमीन दी जाएगी। उनके नाम पर 16.5 बीघा जमीन आवंटित भी की गई। खटीमा के एसडीएम ने बाकायदा जमीन का पट्टा और खाता खतौनी भी शौर्य चक्र विजेता के परिवार को प्रदान किया। भगवान सिंह का कहना है कि जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए कई बार चक्कर लगा दिए गए हैं। वह कहते हैं कि जमीन के लिए बार बार पिथौरागढ़ से चकरपुर जा पाना संभव नहीं होता। भगवान सिंह भी पूर्व सैनिक हैं। उन्होंने एक बार फिर से डीएम को पत्र लिखकर मांग की है कि उनके पिता के नाम पर मंजूर जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। ताकि शौर्य चक्र विजेता को समुचित सम्मान मिल सके।
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स्व. गोपाल सिंह को राष्ट्रपति ने उनकी मृत्यु के बाद 1976 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनकी पत्नी सीता देवी ने हासिल किया। उसी समय यह घोषणा की गई थी कि शौर्य चक्र विजेता के परिवार को चकरपुर के पास बिलहरी में जमीन दी जाएगी। उनके नाम पर 16.5 बीघा जमीन आवंटित भी की गई। खटीमा के एसडीएम ने बाकायदा जमीन का पट्टा और खाता खतौनी भी शौर्य चक्र विजेता के परिवार को प्रदान किया। भगवान सिंह का कहना है कि जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए कई बार चक्कर लगा दिए गए हैं। वह कहते हैं कि जमीन के लिए बार बार पिथौरागढ़ से चकरपुर जा पाना संभव नहीं होता। भगवान सिंह भी पूर्व सैनिक हैं। उन्होंने एक बार फिर से डीएम को पत्र लिखकर मांग की है कि उनके पिता के नाम पर मंजूर जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। ताकि शौर्य चक्र विजेता को समुचित सम्मान मिल सके।
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