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कुर्बानी के एवज में मिला है उत्तराखंड राज्य, आंदोलनकारियों के सपने नहीं हुए साकार
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पिथौरागढ़/चंपावत। पृथक राज्य के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों का कहना है कि पृथक राज्य के लिए कई आंदोलनकारियों ने शहादत दी, लेकिन शहीदों की परिकल्पना जैसा राज्य दो दशक में भी नहीं बन पाया। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में शासन करने वाली राजनीतिक पार्टियों ने बारी-बारी प्रदेश को लूटकर हाशिए पर खड़ा कर दिया।
राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य आंदोलन के दौरान पृथक राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों को बिना कसूर जेल में बंद कर उन्हें यातनाएं दी गई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की शहादत के एवज में मिला है। तब आंदोलनकारियों ने जिस पृथक राज्य की परिकल्पना को देखकर आंदोलन चलाया गया वह परिकल्पानाएं राज्य बनने के बाद धरातल पर दिख ही नहीं रही हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा सरकारी तौर पर नामभर की है। आज तक यहां सत्ता पर आई भाजपा और कांग्रेस की सरकारों राज्य को लूट कर अपना खजाना भरा है। लोग रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं। सुदूरवर्ती क्षेत्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। पृथक राज्य बनने का फायदा सिर्फ नेताओं को हुआ आम आदमी को कुछ भी नहीं मिला।
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बोले आंदोलनकारी -
राज्य आंदोलन जिस पृथक राज्य की परिकल्पना को देखते हुए किया गया वे परिकल्पनाएं राज्य बनने के बाद पूरी नहीं हो पाई है। यहां शासन करने वाली सरकारों ने राज्य को लूटने का कार्य किया गया। आज तक सरकारें उत्तराखंड राजधानी को तय नहीं कर पाई हैं। जनता ने जो जनमत देकर भाजपा और कांग्रेस की सरकारों को बनाया उनने जनमत का गलत फायदा उठाया।
काशी सिंह ऐरी, राज्य आंदोलनकारी एवं वरिष्ठ नेता उक्रांद
राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों को तरह-तरह की यातनाएं दी गई। राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ कर जनभावनाओं को ठेस पहुंचाई। आंदोलनकारियों ने जिस राज्य का सपना देखा वे सपने पूरे नहीं हो पाए। आज उत्तराखंड के सीएम को भ्रष्टाचार की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाकर बचना पड़ रहा है। - चंद्रशेखर कापड़ी, राज्य आंदोलनकारी।
राज्य स्थापना के 20 सालों बाद भी उत्तराखंड का विकास नहीं हो पाया। बेरोजगारी चरम पर है। लोगों को सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए भी आंदोलन करना पड़ रहा है। युवा रोजगार नहीं मिलने के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर है। पृथक राज्य बनने का फायदा सिर्फ नेताओं को हुआ। - तपन रावत, राज्य आंदोलनकारी।
पृथक राज्य आंदोलन की मांग को लेकर प्रदेश के हर वर्ग के लोगों ने आंदोलन किया। राज्य की मांग को लेकर विश्व में पहली बार कर्मचारियों ने 94 दिन तक आंदोलन किया। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में कुछ भी अच्छा नहीं हो पाया। बेरोजगारी चरम पर है दैनिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को आज तक स्थायी नहीं किया गया है। - दिनेश गुरुरानी, राज्य आंदोलनकारी व कर्मचारी नेता।
राज्य आंदोलन में 19 दिन जेल काटी। सोचा था अपना राज्य अपनों के लिए होगा, जन प्रतिनिधि सही मायने में जनता के हमदर्द होंगे। पर राज्य बनने के बाद से अब तक ये धारणा और जनता की राज्य के प्रति अवधारणा दोनों गलत साबित हुई है। नेता बढ़े जरूर हैं, लेकिन जनता से उनकी दूरी भी बढ़ी है। प्रेम चंद, राज्य आंदोलनकारी, बनबसा।
रोजगार को लेकर शुरू हुए उत्तराखंड राज्य का आंदोलन आज भी अपने मकसद से दूर है। उत्तराखंड रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय खुद बेरोजगार प्रदेश का पर्याय बन गया है। करीब एक-चौथाई युवा काम की तलाश में हैं। न सरकारी और नहीं कृषि या दूसरे क्षेत्रों में काम के नए अवसर पैदा हो पा रहे हैं। बहादुर सिंह फर्त्याल, राज्य आंदोलनकारी, चंपावत।
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राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य आंदोलन के दौरान पृथक राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों को बिना कसूर जेल में बंद कर उन्हें यातनाएं दी गई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की शहादत के एवज में मिला है। तब आंदोलनकारियों ने जिस पृथक राज्य की परिकल्पना को देखकर आंदोलन चलाया गया वह परिकल्पानाएं राज्य बनने के बाद धरातल पर दिख ही नहीं रही हैं।
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स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा सरकारी तौर पर नामभर की है। आज तक यहां सत्ता पर आई भाजपा और कांग्रेस की सरकारों राज्य को लूट कर अपना खजाना भरा है। लोग रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं। सुदूरवर्ती क्षेत्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। पृथक राज्य बनने का फायदा सिर्फ नेताओं को हुआ आम आदमी को कुछ भी नहीं मिला।
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बोले आंदोलनकारी -
राज्य आंदोलन जिस पृथक राज्य की परिकल्पना को देखते हुए किया गया वे परिकल्पनाएं राज्य बनने के बाद पूरी नहीं हो पाई है। यहां शासन करने वाली सरकारों ने राज्य को लूटने का कार्य किया गया। आज तक सरकारें उत्तराखंड राजधानी को तय नहीं कर पाई हैं। जनता ने जो जनमत देकर भाजपा और कांग्रेस की सरकारों को बनाया उनने जनमत का गलत फायदा उठाया।
काशी सिंह ऐरी, राज्य आंदोलनकारी एवं वरिष्ठ नेता उक्रांद
राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों को तरह-तरह की यातनाएं दी गई। राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ कर जनभावनाओं को ठेस पहुंचाई। आंदोलनकारियों ने जिस राज्य का सपना देखा वे सपने पूरे नहीं हो पाए। आज उत्तराखंड के सीएम को भ्रष्टाचार की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाकर बचना पड़ रहा है। - चंद्रशेखर कापड़ी, राज्य आंदोलनकारी।
राज्य स्थापना के 20 सालों बाद भी उत्तराखंड का विकास नहीं हो पाया। बेरोजगारी चरम पर है। लोगों को सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए भी आंदोलन करना पड़ रहा है। युवा रोजगार नहीं मिलने के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर है। पृथक राज्य बनने का फायदा सिर्फ नेताओं को हुआ। - तपन रावत, राज्य आंदोलनकारी।
पृथक राज्य आंदोलन की मांग को लेकर प्रदेश के हर वर्ग के लोगों ने आंदोलन किया। राज्य की मांग को लेकर विश्व में पहली बार कर्मचारियों ने 94 दिन तक आंदोलन किया। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में कुछ भी अच्छा नहीं हो पाया। बेरोजगारी चरम पर है दैनिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को आज तक स्थायी नहीं किया गया है। - दिनेश गुरुरानी, राज्य आंदोलनकारी व कर्मचारी नेता।
राज्य आंदोलन में 19 दिन जेल काटी। सोचा था अपना राज्य अपनों के लिए होगा, जन प्रतिनिधि सही मायने में जनता के हमदर्द होंगे। पर राज्य बनने के बाद से अब तक ये धारणा और जनता की राज्य के प्रति अवधारणा दोनों गलत साबित हुई है। नेता बढ़े जरूर हैं, लेकिन जनता से उनकी दूरी भी बढ़ी है। प्रेम चंद, राज्य आंदोलनकारी, बनबसा।
रोजगार को लेकर शुरू हुए उत्तराखंड राज्य का आंदोलन आज भी अपने मकसद से दूर है। उत्तराखंड रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय खुद बेरोजगार प्रदेश का पर्याय बन गया है। करीब एक-चौथाई युवा काम की तलाश में हैं। न सरकारी और नहीं कृषि या दूसरे क्षेत्रों में काम के नए अवसर पैदा हो पा रहे हैं। बहादुर सिंह फर्त्याल, राज्य आंदोलनकारी, चंपावत।