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छियालेख बुग्याल में बिखरने लगी फूलों की छटा
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:47 PM IST
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छियालेख में खिले खूबसूरत फूल
- फोटो : अमर उजाला
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धारचूला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित छियालेख के बुग्याल में विभिन्न प्रकार के फूलों की छटा बिखरने लगी है। इसे गढ़वाल की फूलों की घाटी की तरह मान्यता मिली है। यह बात अलग है कि सड़क निर्माण के कारण छियालेख के बुग्यालों में स्थित फूलों को नुकसान पहुंचने लगा है। इस बुग्याल में कई ऐसी जड़ीबूटियां भी हैं जो तुरंत घावों को भर देती हैं।
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छियालेख में मिलने वाली वनस्पति, जड़ीबूटी, पौधों के बारे में कई लोग अध्ययन कर चुके हैं। इस बुग्याल में प्रीटा रॉयली, ब्रह्मकमल, प्रिंक प्रिमूला, गोल्डन लिली, क्रीमी अनीमोन, लार्ज पर्पल एस्टर, ब्ल्यू पॉपी, व्हाइट एंड रेड पोटेंनिटिला समेत कई प्रजातियों के फूल मिलते हैं। मार्च आते ही यह फूल खिलने लग जाते हैं और मई तक इनकी छटा बिखरी रहेगी। कुछ फूल ऐसे हैं जो सालभर खिलते हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बूंदी पड़ाव से तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद जब छियालेख पहुंचते हैं तो रंग बिरंगे फूल लोगों की थकान को मिटा देते हैं। यह बात अलग है कि इन फूलों के बारे में आम लोग ज्यादा जानकारी नहीं रखते। सिर्फ कैलाश मानसरोवर और छोटा कैलाश यात्रियों को ही इन फूलों को देखने का सौभाग्य मिलता है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि महर्षि वेद व्यास ने कई वर्षों तक छियालेख में तपस्या की।
हो सकता है कि इन फूलों को महर्षि व्यास ने ही रोपा हो। वैसे भी उच्च हिमालयी क्षेत्र के ठंडे वातावरण में कई जड़ीबूटियां और फूल मिल जाते हैं। जिला पंचायत सदस्य मंजुला बुदियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल का कहना है कि गढ़वाल के फूलों के घाटी के तर्ज पर छियालेख को भी पर्यटकों से रूबरू कराने के लिए सरकार को विशेष प्रयास करने चाहिए और हवाई सेवा से भी लोगों को फूलों की घाटी आने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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कई अन्य बुग्यालों में मिलते हैं फूल
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रोफेसर सीएस नेगी ने छियालेख समेत धारचूला और मुनस्यारी के कई बुग्यालों का अध्ययन किया है। प्रो. नेगी का कहना है कि हिमालय के कई अन्य बुग्यालों में विभिन्न प्रकार के फूल मिलते हैं। ऐसे बुग्यालों की संख्या 40 के करीब होगी। किसी में बहुत अधिक तो किसी में कम फूल मिलते हैं।