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Pithoragarh News: छात्रसंख्या कम होने से खंडहर बन गए विद्यालय
Tue, 28 Jan 2025 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 28 Jan 2025 11:17 PM IST
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या तेजी से घट रही है। गंगोलीहाट में छात्र संख्या कम होने के कारण पिछले 10 वर्षों में 24 राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं। इन विद्यालयों के लिए लाखों की लागत से बनाए गए भवन वीरान पड़े हैं।
जिन विद्यालयों में आज से दो-ढाई दशक पहले तक 50 से 100 छात्र संख्या होती थी उन विद्यालयों में गिने चुने छात्र पढ़ रहे हैं। यहां तक कि छात्र संख्या कम होने के कारण गंगोलीहाट में मात्र एक दशक में 24 विद्यालयों में ताले लटक गए हैं। छात्र संख्या शून्य होने के चलते साल 2014-15 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय रैतौली को विभाग ने बंद कर दिया था।
2016-17 में प्राथमिक विद्यालय शिवना और न्योलियासेरा को बंद किया गया। 2017-18 में प्राथमिक विद्यालय कधारी, सिमाली, नवीन सीमा, बहिलकोट, खड़की बज्यूड़ा और मनखोला को बंद करना पड़ा।
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वर्ष 2018-19 में प्राथमिक विद्यालय सुनारगांव, धपना, सुंगर नौला, खुलेत और बाजड़ विद्यालय भी बंद हो गए। साल 2021 में प्राथमिक विद्यालय ल्वैचट्टासोंणा, सेरागड़ा, 2022-23 में प्राथमिक विद्यालय दुगई कंयूरी, बुरुषखोली, पाभे और 2024 में प्राथमिक विद्यालय रस्यून, पभ्या, काकड़ा, गंतोला को बंद किया गया।
वहीं दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय जमतोला 1997 से संचालित नहीं हुआ है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक तरुण पंत का कहना है कि छात्र संख्या होने पर बंद विद्यालयों को फिर से संचालित किया जाएगा।
निजी स्कूल व पलायन भी है छात्र संख्या कम होने का कारण
पिथौरागढ़। पिछले दो दशकों में प्रमुख कस्बों तक प्राइवेट स्कूल खुलने से लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों के बजाय प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा लोगों के गांवों से तेजी से पलायन करने के कारण भी सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या तेजी से घटी है।
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जिन विद्यालयों में आज से दो-ढाई दशक पहले तक 50 से 100 छात्र संख्या होती थी उन विद्यालयों में गिने चुने छात्र पढ़ रहे हैं। यहां तक कि छात्र संख्या कम होने के कारण गंगोलीहाट में मात्र एक दशक में 24 विद्यालयों में ताले लटक गए हैं। छात्र संख्या शून्य होने के चलते साल 2014-15 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय रैतौली को विभाग ने बंद कर दिया था।
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2016-17 में प्राथमिक विद्यालय शिवना और न्योलियासेरा को बंद किया गया। 2017-18 में प्राथमिक विद्यालय कधारी, सिमाली, नवीन सीमा, बहिलकोट, खड़की बज्यूड़ा और मनखोला को बंद करना पड़ा।
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वर्ष 2018-19 में प्राथमिक विद्यालय सुनारगांव, धपना, सुंगर नौला, खुलेत और बाजड़ विद्यालय भी बंद हो गए। साल 2021 में प्राथमिक विद्यालय ल्वैचट्टासोंणा, सेरागड़ा, 2022-23 में प्राथमिक विद्यालय दुगई कंयूरी, बुरुषखोली, पाभे और 2024 में प्राथमिक विद्यालय रस्यून, पभ्या, काकड़ा, गंतोला को बंद किया गया।
वहीं दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय जमतोला 1997 से संचालित नहीं हुआ है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक तरुण पंत का कहना है कि छात्र संख्या होने पर बंद विद्यालयों को फिर से संचालित किया जाएगा।
निजी स्कूल व पलायन भी है छात्र संख्या कम होने का कारण
पिथौरागढ़। पिछले दो दशकों में प्रमुख कस्बों तक प्राइवेट स्कूल खुलने से लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों के बजाय प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा लोगों के गांवों से तेजी से पलायन करने के कारण भी सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या तेजी से घटी है।