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बर्बाद हो गया एक खुशहाल गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी
Updated Fri, 01 Jul 2016 10:56 PM IST
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बस्तड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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बृहस्पतिवार रात प्रकृति शायद इस गांव की संपन्नता से रूठ गई थी। रात डेढ़ बजे से गांव में तांडव मचा और सुबह 6.30 बजे तक गांव का नक्शा ही बदल गया। चार परिवार पूरी तरह तबाह हो गए। गांव के खेत, रास्ते, बगीचे, हर जगह अब जीवंतता के बजाए विनाश की मनहूसियत दिख रही है। जो लोग बच गए हैं वह भाग्य को कोस रहे हैं। गांव की जो स्थिति अब हो गई है उसे देखकर ऐसा लगता है कि कोई भी व्यक्ति अब गांव में रहने का साहस नहीं कर पाएगा।
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प्रशासन ने भी माना है कि गांव असुरक्षित हो गया है। गांव के अर्जुन कन्याल ने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे प्रशासन को सूचना दे दी थी, लेकिन दुर्भाग्य से प्रशासन की टीम डेढ़ बजे दोपहर तक पहुंच पाई। गांव को जोड़ने वाले सारे रास्ते बंद हो गए। 25 परिवारों वाले इस गांव के 5 परिवार समाप्त हो गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि प्रकृति हमसे रूठ गई है। गांव में इससे पहले भू-कटाव के नाम पर मिट्टी का टुकड़ा तक नहीं गिरा था। आज गांव का नक्शा ही बदल गया है।
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बस्तड़ी कनालीछीना विकासखंड और डीडीहाट तहसील का ऐसा गांव है, जहां पर लोग अब तक संपन्नता से जीवनयापन कर रहे थे। गांव में माल्टा, नींबू, संतरा के अलावा सब्जियों का उत्पादन खूब होता है। लोगों की आजीविका आसानी से चल रही थी। गांव में करीब 40 फीसदी लोग सरकारी सेवा में हैं। शिक्षा का स्तर काफी अच्छा है। नजदीक में जीआईसी सिंघाली में लोग शिक्षा ग्रहण करते हैं। भागीचौरा और सिंघाली क्षेत्र में अक्सर पानी का अभाव रहता है, लेकिन बस्तड़ी में प्राकृतिक स्रोत बहुत हैं। पानी की कमी यहां नहीं रहती। ऐसे खुशहाल गांव को प्रकृति की चोट ने गहरे जख्म दे दिए हैं।
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