PHOTOS: भारी बारिश के बाद उफान पर नदियां, सड़कों पर सैलाब...भूस्खलन के बाद बढ़ा खतरा; 16 सड़कें बंद
पिथौरागढ़ और चंपावत में मानसून की मूसलाधार बारिश से पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पिथौरागढ़ जिले की 20 और चंपावत जिले की 16 सड़कें बंद हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
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पिथौरागढ़ और चंपावत में मानसून की मूसलाधार बारिश से पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पिथौरागढ़ जिले की 20 और चंपावत जिले की 16 सड़कें बंद हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। धारचूला में काली नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सड़कें बंद होने और बोल्डर गिरने से सैनिकों और आम नागरिकों को आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं। रोडवेज प्रबंधन ने सड़कों के बंद होने और मलबा आने से लंबी दूरी का संचालन बंद कर दिया। पूर्णागिरि मार्ग और सोबला-ढाकर-नागलिंग सड़क बंद होने से कई यात्री फंसे रहे। प्रशासन और आम लोगों ने उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराया।
बिजली लाइनों के टूटने से कई इलाकों की बिजली आपूर्ति ठप है। लोगों को पेयजल किल्लत भी झेलनी पड़ रही है। भूस्खलन से कई स्थानों पर आवासों को खतरा हो गया है। कई दुकानों और घरों में पानी घुस गया। सेना के जवानों और आम लोगों ने यातायात व्यवस्था बनाने में सहयोग किया। दोनों जिलों में दिनभर बारिश होने से यात्रियों, मरीजों, आम लोगों को खासी दिक्कतें हुईं।
सीमांत जिले में मलबा और बोल्डर गिरने से 20 सड़कें बंद
पिथौरागढ़, धारचूला, गणाई गंगोली, थल, डीडीहाट में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सीमांत जिले में मलबा और बोल्डर गिरने से 20 सड़कें बंद हैं। धारचूला में काली नदी चेतावनी स्तर को पार कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। प्रशासन ने नदी तट पर रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। जिला मुख्यालय समेत अधिकांश जगहों पर बृहस्पतिवार रात से बारिश जारी है। उधर चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क पांचवें दिन भी बंद रही।
इससे दारमा, व्यास, चौंदास घाटी के ग्रामीणों के साथ ही सुरक्षा बलों के जवानों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काली नदी चेतावनी स्तर 889.400 मीटर पर पहुंच गई है। इसका खतरे का निशान 890 मीटर पर है। मदकोट में गोरी नदी भी उफान पर है। मुनस्यारी के चुलकोट गांव में मकान और विद्युत पोल भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। इससे 15 परिवारों को खतरे की आशंका सता रही है।
इधर थल में रामगंगा और उसकी सहायक नदी कोकिला और बहुला का भी जलस्तर बढ़ गया है। साथ ही थल-सातशिलिंग सड़क पानी धारे के पास हल्की बारिश में ही तलैया बन गई है। इससे राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं डीडीहाट-दूनाकोट मोटर मार्ग में पहाड़ी से पत्थर गिरने का भय बना हुआ है। डीडीहाट-कुनिया, आदिचौरा-सीनी चामा, आदिचौरा-हुनेरा, डीडीहाट-आदिचौरा मोटर मार्ग भी काफी खतरनाक बने हुए हैं।
भूस्खलन से आवास को खतरा
गंगोलीहाट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवास भूस्खलन से खतरे की जद में आ गया है। कुंजनपुर निवासी उमा उप्रेती ने एसडीएम को भेजे पत्र में कहा कि वह दिव्यांग हैं। काफी कोशिशों के बाद उन्हें आवास मिला। कहा है कि पिछले चार दिन से लगातार हो रही बारिश से निर्माणाधीन आवास में मलबा आ गया है। दीवारों में दरार आ गई है। उन्होंने मुआवजे दिलाने की मांग की है।
बेड़ीनाग क्षेत्र में ट्रांसफार्मर फुंके
बेड़ीनाग में बृहस्पतिवार रात आए आंधी तूफान से कई गांवों में बिजली लाइन खराब हो गई है। मंतोली, गोल, नायल मूसलीगाड़ समेत कई गांवों में विद्युत ट्रांसफार्मर फुंक गए हैं। विद्युत विभाग के सुपरवाइजर मनोज पंत ने बताया कि लाइन ठीक करने का कार्य किया जा रहा है।
कहां कितनी बारिश
धारचूला 100.20 मिमी
बंगापानी 55 मिमी
तेजम 48 मिमी
पिथौरागढ़ 18 मिमी
मुनस्यारी 26.40 मिमी
देवलथल 23 मिमी
गंगोलीहाट 21 मिमी
डीडीहाट 13 मिमी
कनालीछीना 26 मिमी
थल 18.20 मिमी
इन सड़कों पर आया मलबा
थल-मुनस्यारी, पमतोड़ी-भांतड़, धारचूला-तवाघाट, पिथौरागढ़-धारचूला, नाचनी-भैंसकोट, बंगापानी-जाराजिबली, बांसबगड़-धामीगांव, बांसबगड़-सेलमाली-कोटा, बांसबगड़-गूंठी, मदकोट-तोमिक, खुमती-कटौजिया, गलाती-रमतोली धामीगांव, टनकपुर-तवाघाट खेला-गर्गुवा, आदिचौरा-सीनी, पौड़ी-घटकुना, ड्योड़ा-बारमो, मदकोट-बोना झापुली, डीडीहाट-आदिचौरा, डीडीहाट-हुनेरा, पांखू-चौसाला नौलाड़ा।
एनएच बंद होने से रोडवेज बस का संचालन ठप, यात्री रहे परेशान
लोहाघाट, टनकपुर में लगातार हो रही भारी बारिश से कई स्थानों पर काफी नुकसान हुआ है। आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार गंगाली में रूप सिंह पुत्र गिरधर सिंह और चौपता के राजेंद्र सिंह बोहरा के आंगन की दीवार ध्वस्त होने से मकान को खतरा पैदा हो गया है। फोर्ती में मदन उपाध्याय पुत्र नारायण दत्त उपाध्याय के घर की दीवार ध्वस्त हो गई। बाराकोट में लोनिवि की ओर से करीब दो माह पूर्व बनाई गई बरदाखान-बिसराड़ी सड़क की सुरक्षा दीवार भी बारिश नहीं झेल पाई। वहीं भारी बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में गल्लागांव-देवलीमांफी, कामाज्यूला-भनार, सिमलखेत-सिब्योली, रीठा-बिनवालगांव, धौन-बडोली आदि कई मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। वहीं बाटनागाड़ में हल्का मलबा आना जारी है। दिनभर लोनिवि की जेसीबी मलबा हटाती रही। इस बीच यातायात सुचारु रहा।
इधर कलक्ट्रेट सड़क से लगी छतार नदी में पानी बढ़ने से लोगों को टंकी से पीने का पानी भरने में दिक्कत आ रही है। पेयजल के लिए लोगों को नदी पार कर टंकी तक पहुंचना पड़ रहा है। जगह-जगह मलबा आने से मरीजों को जिला अस्पताल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकांश मरीज बारिश में तरबतर नजर आए। अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्र से खांसी, जुकाम, बुखार, शुगर, बीपी के साथ छोटे बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। पीएमएस डॉ. पीएस खोलिया ने मरीजों से अधिक बारिश में जरूरी होने पर अस्पताल आने की अपील की है। इधर चंपावत बस स्टेशन से रीठा साहिब गुरुद्वारा तक जगह-जगह कीचड़ और जल भराव होने से तीर्थ यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। टनकपुर रेलवे अंडरपास में जलभराव होने से लोगों को परेशानी हुई।
मां पूर्णागिरि धाम के पैदल मार्ग पर आया मलबा, मार्ग बंद
टनकपुर में भारी बारिश के कारण मां पूर्णागिरि धाम में मुख्य मंदिर से करीब पांच सौ मीटर नीचे पैदल मार्ग में भारी मलबा आने से मार्ग बंद हो गया। मंदिर समिति ने मलबा हटाने तक मुख्य मंदिर के कपाट बंद कर दिए हैं। साथ ही काली मंदिर के पास मुख्य गेट बंद होने पर श्रद्धालुओं ने गेट पर ही पूजा अर्चना की। मंदिर समिति के सदस्यों ने मुख्य मंदिर के पास से करीब 100 से अधिक लोगों को सुरिक्षत निकाला।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को मां पूर्णागिरि के पुजारी बेनी प्रसाद पांडेय सुबह मंदिर में पूजा कर रहे थे। इस बीच मंदिर क्षेत्र में करीब 100 से अधिक श्रद्धालु थे। सुबह करीब 11:30 बजे मुख्य मंदिर से करीब 500 मीटर नीचे पैदल मार्ग पर पहाड़ी से अचानक भारी मलबा आ गया। इससे पैदल मार्ग बंद हो गया। गनीमत रही कि उस समय मौके पर कोई नहीं था। पुजारी बेनी प्रसाद पांडेय ने बताया कि अब मार्ग खुलने पर काली मंदिर के समीप बंद गेट पर ही श्रद्धालु पूजा कर रहे हैं।
मलबा आने की सूचना मिलने पर मंदिर समिति के कार्यालय प्रभारी पीतांबर तिवारी ने स्वयंसेवकों को साथ लेकर करीब 100 से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित पैदल मार्ग से निकाला। मंदिर समिति के अध्यक्ष किशन तिवारी ने बताया कि मार्ग खुलने तक मुख्य मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं।
इधर, एसडीएम आकाश जोशी ने बताया कि लोनिवि को मलबा हटाने के निर्देश दे दिए हैं। लोनिवि के एई लक्ष्मण सिंह सामंत ने मार्ग का निरीक्षण कर बताया कि शनिवार सुबह से मलबा हटाने का काम शुरू किया जाएगा और शाम तक एक ओर पैदल निकलना शुरू करा दिया जाएगा।
रेलवे के अंडरपास में हुआ जलभराव
बनबसा में रेलवे का नवनिर्मित अंडरपास बारिश में आवागमन में नाकाम साबित हो रहा है। पानी भरने से दोपहिया वाहनों का आवागमन दूभर हो गया है। कमलपथ से सेना छावनी, फागपुर, सैलानीगोठ आने-जाने के लिए रेलवे फाटक को बंद कर अंडरपास बनाया गया, लेकिन बरसात शुरू होते ही अंडरपास पर जलभराव होने से यहां से दोपहिया वाहनों का आवागमन नहीं हो पा रहा है। नागरिकों ने पहले ही रेलवे प्रशासन से अंडरपास की जगह फ्लाई ओवर बनाने की मांग की थी।
लोहाघाट स्टेशन बाजार में नाली चोक होने से व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बारिश का पानी दुकानों में घुसने लगा तो व्यापारी खुद ही बंद नालियों को खोलने में जुट गए। नालियों की सफाई न होने पर व्यापारियों ने पालिका के प्रति गहरी नाराजगी जताई। नाराज व्यापारियों ने कहा कि जब तक बंद नालियों को नहीं खोला जाता तब तक वह सेवा शुल्क नहीं देंगे। इधर, पालिका के ईओ पूरन सिंह बोहरा ने बताया मामला संज्ञान में आया है। पर्यावरण मित्रों को नगर की सभी बंद नालियों को खोलने के लिए निर्देश दिए हैं।
चंपावत जिले में बारिश से 16 ग्रामीण सड़कें बंद होने से 30 से अधिक गांव की आबादी को दिक्कत का सामना करना पड़ा। सड़क मार्ग बंद होने से इन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। धौन, बडोली, द्यूरी, बजौन, टकनागूंठ, डाडामल्ला, अमोड़ी, छतकोट, धुरचुम, जमरानी, पाली, लेटी, रियासी, तरकुली, रीठा, बिनवालगांव, सिमलखेत, सिब्यूली समेत 30 से अधिक गांव के लोग अपने उत्पाद बाजार लेकर आते हैं, लेकिन पिछले दो दिन से सड़क बंद होने से लोगों के लिए अपने उत्पाद बाजार तक लाना संभव नहीं हो पा रहा है। आपदा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 24 घंटे में चंपावत में 55, बनबसा 11, लोहाघाट 10.50, पाटी 10 मिमी बारिश हुई।