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लौटी जाओ घर को भारत वीर....
ब्यूरो, अमर उजाला पिथौरागढ़।
Updated Mon, 13 Nov 2017 11:15 PM IST
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चामाचौड़ की रामलीला में राम-भरत संवाद।
- फोटो : अमर उजाला
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चामाचौड़ की रामलीला में पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। राम को मनाने भरत चित्रकूट गए लेकिन भगवान राम ने अयोध्या लौटने से मना कर दिया।
राम, सीता लक्ष्मण के सरयू पार जाने के बाद मंत्री सुमंत अयोध्या वापस लौट आते हैं। मंत्री से राम, सीता, लक्ष्मण के अयोध्या न लौटने की सूचना पाकर राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। राजा दशरथ के निधन के पश्चात ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न कोे बुलाया जाता है। पिता के निधन और राम के वनवास जाने की सूचना पाकर भरत अत्यंत दुखी हो जाते हैं। माता कैकेई को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए खरी-खोटी सुनाते हैं। शत्रुघ्न कैकेई की दासी मंथरा पर अपना क्रोध निकालते हैं। मंथरा को लात तक मार देते हैं।
भरत तीनों माताओं और शत्रुघ्न के साथ चित्रकूट पहुंचकर भगवान राम से अयोध्या वापस लौटने का निवेदन करते हैं। भगवान राम पिता के निधन से दुखी हो जाते हैं। विलाप करते हुए कहते हैं-करी क्या हाय कर्ता ने, विपत सब एक दम डारी। भगवान राम अयोध्या लौटने से इंकार करते हुए भरत से कहते हैं-लौटी जाओ घर को भारत वीर, बैठि अयोध्या राज करो भैय्या, निर्मल सरयू तीर, भूखन को भय्या भोजन दीजो, नंगन को पहनाओ चीर, भारत वीर। भगवान राम अपनी खड़ांऊ भरत को देकर उन्हें अयोध्या वापस लौटा देते हैं।
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राम, सीता लक्ष्मण के सरयू पार जाने के बाद मंत्री सुमंत अयोध्या वापस लौट आते हैं। मंत्री से राम, सीता, लक्ष्मण के अयोध्या न लौटने की सूचना पाकर राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। राजा दशरथ के निधन के पश्चात ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न कोे बुलाया जाता है। पिता के निधन और राम के वनवास जाने की सूचना पाकर भरत अत्यंत दुखी हो जाते हैं। माता कैकेई को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए खरी-खोटी सुनाते हैं। शत्रुघ्न कैकेई की दासी मंथरा पर अपना क्रोध निकालते हैं। मंथरा को लात तक मार देते हैं।
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भरत तीनों माताओं और शत्रुघ्न के साथ चित्रकूट पहुंचकर भगवान राम से अयोध्या वापस लौटने का निवेदन करते हैं। भगवान राम पिता के निधन से दुखी हो जाते हैं। विलाप करते हुए कहते हैं-करी क्या हाय कर्ता ने, विपत सब एक दम डारी। भगवान राम अयोध्या लौटने से इंकार करते हुए भरत से कहते हैं-लौटी जाओ घर को भारत वीर, बैठि अयोध्या राज करो भैय्या, निर्मल सरयू तीर, भूखन को भय्या भोजन दीजो, नंगन को पहनाओ चीर, भारत वीर। भगवान राम अपनी खड़ांऊ भरत को देकर उन्हें अयोध्या वापस लौटा देते हैं।
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