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नामिक में नहीं पहुंची विकास की किरण
Wed, 30 Jan 2019 12:13 AM IST
kamlesh kamlesh
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:13 AM IST
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हिमालय की तलहटी में बसा नामिक गांव: (फाइल फोटो)
- फोटो : AMAR UJALA
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हिमालयी क्षेत्र का नामिक यातायात ही नहीं संचार समेत तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। अक्तूबर से फरवरी तक पांच महीने बर्फ के आगोश में रहने वाले नामिक की खासियत यह है कि इस गांव के लोगों ने तमाम अभावों के बाद भी अपनी माटी नहीं छोड़ी, यानी कि पलायन नहीं किया।
बेहतरीन राजमा, आलू की उपज के लिए मशहूर इस गांव के लोग एक प्रकार से आदम जमाने की भांति रह रहे हैं। यह खूबसूरत गांव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। पिथौरागढ़ जिले के बिर्थी से यदि नामिक जाना हो तो 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। बागेश्वर जिले के गोगिना से गांव जाना हो तो 7 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। गांव में स्वास्थ्य की भी कोई सुविधा नहीं है। गांव में स्वास्थ्य सुविधा का भी बुरा हाल है। गर्भवती महिलाओं, नवजातों को गांव में टीके तक नहीं लगते।
टीके लगाने के लिए इन लोगों को 15 किमी दूर बला आना पड़ता है। वर्ष 2011 में नामिक में एएनएम सेंटर को स्वीकृति दी गई, उद्घाटन हुआ लेकिन संचालन नहीं हुआ। शिक्षा के नाम पर गांव में सरकारी प्राथमिक पाठशाला और हाईस्कूल है। वर्ष 2011 में स्थापित हाईस्कूल में मात्र एक शिक्षक तैनात है। जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक भगवान सिंह जेम्याल हाईस्कूल का संचालन करते हैं। संचार व्यवस्था के नाम पर प्रधान के घर पर सेटेलाइट फोन लगा है, जो तीन साल से खराब है। गांव के लोगों की जीवटता ही कही जाएगी कि घोर अभावों के बाद भी गांव में 118 परिवार निवास करते हैं। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि अभावों के बाद भी पलायन न करने वाले गांव की सुध सरकार और सरकारी अमले को लेनी चाहिए।
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नामिक के लिए बन रही सड़क
पिथौरागढ़। नामिक के लिए होकरा से 17 किमी लंबी सड़क का निर्माण हो रहा है। नामिक के लोगों के संघर्षों के बाद वर्ष 2015 में सड़क मंजूर हुई। वर्ष 2018 में सड़क का कार्य प्रारंभ हुआ। करीब ढाई किमी सड़क का निर्माण हुआ है। वर्ष 2020 तक नामिक सड़क पहुंचने की उम्मीद है। सड़क बनने के बाद इस हिमालयी गांव के दिन तो बहुरेंगे ही, पर्यटकों की पहुंच में भी सुंदर नामिक आ जाएगा।
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बेहतरीन राजमा, आलू की उपज के लिए मशहूर इस गांव के लोग एक प्रकार से आदम जमाने की भांति रह रहे हैं। यह खूबसूरत गांव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। पिथौरागढ़ जिले के बिर्थी से यदि नामिक जाना हो तो 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। बागेश्वर जिले के गोगिना से गांव जाना हो तो 7 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। गांव में स्वास्थ्य की भी कोई सुविधा नहीं है। गांव में स्वास्थ्य सुविधा का भी बुरा हाल है। गर्भवती महिलाओं, नवजातों को गांव में टीके तक नहीं लगते।
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टीके लगाने के लिए इन लोगों को 15 किमी दूर बला आना पड़ता है। वर्ष 2011 में नामिक में एएनएम सेंटर को स्वीकृति दी गई, उद्घाटन हुआ लेकिन संचालन नहीं हुआ। शिक्षा के नाम पर गांव में सरकारी प्राथमिक पाठशाला और हाईस्कूल है। वर्ष 2011 में स्थापित हाईस्कूल में मात्र एक शिक्षक तैनात है। जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक भगवान सिंह जेम्याल हाईस्कूल का संचालन करते हैं। संचार व्यवस्था के नाम पर प्रधान के घर पर सेटेलाइट फोन लगा है, जो तीन साल से खराब है। गांव के लोगों की जीवटता ही कही जाएगी कि घोर अभावों के बाद भी गांव में 118 परिवार निवास करते हैं। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि अभावों के बाद भी पलायन न करने वाले गांव की सुध सरकार और सरकारी अमले को लेनी चाहिए।
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पिथौरागढ़। नामिक के लिए होकरा से 17 किमी लंबी सड़क का निर्माण हो रहा है। नामिक के लोगों के संघर्षों के बाद वर्ष 2015 में सड़क मंजूर हुई। वर्ष 2018 में सड़क का कार्य प्रारंभ हुआ। करीब ढाई किमी सड़क का निर्माण हुआ है। वर्ष 2020 तक नामिक सड़क पहुंचने की उम्मीद है। सड़क बनने के बाद इस हिमालयी गांव के दिन तो बहुरेंगे ही, पर्यटकों की पहुंच में भी सुंदर नामिक आ जाएगा।