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प्यारे राम को देना हमें मंजूर नाही है..
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 03 Oct 2016 10:43 PM IST
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प्यारे राम को देना हमें मंजूर नाही है..
- फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय और थल की रामलीला में भगवान राम के हाथों ताड़का, सुबाहू राक्षस मारे गए। गंगोलीहाट में रामलीला प्रारंभ हो गई है।
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जिला मुख्यालय की रामलीला सदर और टकाना की रामलीला में दूसरे दिन की रामलीला की शुरुआत महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन से हुई। महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से राक्षसी ताड़का के वध के लिए राम और लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह करते हैं। राजा दशरथ राम, लक्षमण को बालक बताते हुए कहते हैं ‘प्यारे राम को देना हमें मंजूर नाही है। चाहे माल मांगो, मुलका मांगो दे दूंगा महाराज, चाहे सर को भी मांगो हमें इंकार नाही है’। अंतत: राजा दशरथ राम, लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। भगवान राम ताड़का, सुबाहू का वध कर देते हैं। मारीच को समुद्र पार फेंक देते हैं।
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महर्षि विश्वामित्र राजा जनक के निमंत्रण पर सीता स्वयंवर के लिए जनकपुरी पहुंचते हैं। पुष्प वाटिका में सीता सखियों के साथ टहल रही होती हैं। लक्ष्मण जी कह उठते हैं ‘देखो जी देखो महाराज यह ललनी’। भगवान राम कहते हैं ‘तनिक निहारो तुम जानकी छवि भैय्या, वाटिका फिरत कोटि चंद्र भी लजाई है’। सीता पुष्पवाटिका में मां गौरी की पूजा करती हैं।
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उधर, थल की रामलीला में विश्वामित्र संवाद से लेकर सीता पुष्पवाटिका तक की लीला का मंचन हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्यापारी गंगा सिंह मेहता, भुवन चंद्र भट्ट, भूपेंद्र जंगपांगी थे। गंगोलीहाट में रामजन्म, ताड़का वध और अहिल्या तारण की लीला हुई। रामलीला का उद्घाटन नगर पंचायत अध्यक्ष विमल रावल ने किया। तहसीलदार केएस चुफाल, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आरपी साह आदि मौजूद थे।