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बस्तड़ी के पुष्कर को विस्थापन का इंतजार
संजू पंत/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:27 PM IST
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पुष्कर भट्ट आपदा पीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
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बस्तड़ी गांव में जून 2016 में बादल फटने के चलते काफी तबाही मची थी। तब इसी गांव का पुष्कर दत्त भट्ट किसी मामले में जेल में था। 17 साल जेल की सजा काटने के बाद 15 अगस्त 2017 को उसकी रिहाई हुई। रिहाई के बाद जब वह गांव पहुंचा तो वहां बर्बादी का मंजर देख दहल गया। उसका मकान आपदा के चलते जीर्णशीर्ण हो गया। अन्य कोई ठिकाना नहीं होने से वह छह माह तक अकेला उसी मकान में रहा। पिछले तीन माह से सिंगाली में चाय बेचकर आजीविका चला रहे पुष्कर को अब विस्थापन का इंतजार है।
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पुष्कर की पत्नी की पूर्व में ही मौत हो गई। उसके दो बेटे हैं। छोटा बेटा बचपन से ही लापता है। बड़ा बेटा हिमांशु पूना में नौकरी करता है। बस्तड़ी में बादल फटने की घटना के बाद गांव रहने लायक नहीं रहा। आपदा के बाद शासन ने 24 परिवारों को विस्थापित करने की अनुमति दे दी। इनमें से 23 परिवारों का तो विस्थापन हो गया, लेकिन पुष्कर दत्त भट्ट की धनराशि लेने वाला कोई वारिस गांव में नहीं था। इसके चलते उसके नाम की धनराशि शासन को वापस कर दी गई।
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पिछले वर्ष 15 अगस्त को घर वापस आने पर पुष्कर के लिए रहने का कोई स्थान नहीं था। वह अकेला छह माह तक दरार पड़े जीर्णशीर्ण घर में रहा। पिछले तीन माह से वह सिंगाली में चाय बेचकर अपना गुजारा कर रहा है। सिंगाली के पटवारी शहवान अली ने बताया कि पुष्कर का विस्थापन सूची का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। एसडीएम डीडीहाट वैैैभव गुप्ता ने बताया कि पुष्कर के मकान में दरारें हैं। बारिश के समय उसका ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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