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गौगाड़ नाले पर श्रमदान से तैयार कर दी पुलिया
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:22 PM IST
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बलुवाकोट के गौगाड़ नाले में श्रमदान से तैयार पुलिया।
- फोटो : अमर उजाला
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बलुवाकोट से गैरागांव समेत सात गांवों को जोड़ने के लिए गौगाड़ नाले पर ग्रामीणों ने श्रमदान से फिर पुलिया तैयार कर ली है। सोमवार को दोपहर बाद से इस पुलिया से आवागमन शुरू हो गया है। 27 जुलाई को यह पुलिया टूट गई थी। इस कारण गैरागांव, बोरागांव, कंपास, डिगरा, काणा, पय्यांपौड़ी, जोशीगांव केलोगों के लिए आवागमन का संकट पैदा हो गया था।
लोगों को मालूम था कि सरकार व प्रशासन इतनी जल्दी पुल का निर्माण नहीं करेगा। इसे देखते हुए लोगों ने खुद ही लकड़ी के लट्ठे और तख्ते एकत्र कर श्रमदान से पुल तैयार कर लिया है। इस पुल का निर्माण कार्य रविवार की सुबह से शुरू किया गया और 36 घंटे में पुल का ढांचा खड़ा हो गया। पुल को बनाने में पूर्व प्रधान हरीराम आर्य, सुनील कुमार, पुष्कर आर्या, गणेश राम, प्रताप राम, हरीश भट्ट, भवानी भट्ट, लाल सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र भट्ट, नरेंद्र, दीपू समेत तमाम लोगों ने सहयोग दिया। गौगाड़ नाले पर पहले विकासखंड कार्यालय की मद से पक्का पुल बना था। यह पुल 30 जून 2016 को आई आपदा में बह गया था। उसके बाद लोग लगातार पुल बनाने की मांग करते रहे। जब सरकार ने उनकी आवाज नहीं सुनी तो सितंबर 2016 में लोगों ने श्रमदान से पुल बनाया था। यह पुल 27 जुलाई को टूट गया था। तब से आज तक लोग भारी संकट में थे।
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लोगों को मालूम था कि सरकार व प्रशासन इतनी जल्दी पुल का निर्माण नहीं करेगा। इसे देखते हुए लोगों ने खुद ही लकड़ी के लट्ठे और तख्ते एकत्र कर श्रमदान से पुल तैयार कर लिया है। इस पुल का निर्माण कार्य रविवार की सुबह से शुरू किया गया और 36 घंटे में पुल का ढांचा खड़ा हो गया। पुल को बनाने में पूर्व प्रधान हरीराम आर्य, सुनील कुमार, पुष्कर आर्या, गणेश राम, प्रताप राम, हरीश भट्ट, भवानी भट्ट, लाल सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र भट्ट, नरेंद्र, दीपू समेत तमाम लोगों ने सहयोग दिया। गौगाड़ नाले पर पहले विकासखंड कार्यालय की मद से पक्का पुल बना था। यह पुल 30 जून 2016 को आई आपदा में बह गया था। उसके बाद लोग लगातार पुल बनाने की मांग करते रहे। जब सरकार ने उनकी आवाज नहीं सुनी तो सितंबर 2016 में लोगों ने श्रमदान से पुल बनाया था। यह पुल 27 जुलाई को टूट गया था। तब से आज तक लोग भारी संकट में थे।
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