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जनसुनवाई में भड़के जनप्रतिनिधि
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 19 Apr 2018 10:38 PM IST
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निकाय परिसीमन को लेकर जनसुनवाई करते डीएम
- फोटो : अमर उजाला
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नगर पालिका के परिसीमन को लेकर हुई जनसुनवाई मेें ग्रामीण जनप्रतिनिधि भड़क उठे। उन्होंने पालिका प्रशासन पर बंद कमरे में बैठकर परिसीमन की कार्यवाही का आरोप लगाया। उन्होंने जनभावना के खिलाफ परिसीमन होने पर अदालत में जाने की चेेतावनी भी दी।
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बृहस्पतिवार को पिथौरागढ़ निकाय के परिसीमन को लेकर कलक्ट्रेट में जनसुनवाई हुई। इसमें निकाय के सीमा विस्तार और पुराने वार्डों के पुनर्गठन को लेकर आपत्तियां सुनी गई। इस दौरान सीमा विस्तार के प्रस्ताव में शामिल छह ग्रामों के जनप्रतिनिधियों ने निकाय में शामिल होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने प्रशासन पर मनमाने तरीके से सीमा विस्तार करने की तोहमत मढ़ी। साथ ही निकाय में शामिल होने से इंकार कर दिया। इस बीच दौला के ग्राम प्रधान भूपेश नगरकोटी ने गांव को पालिका में शामिल करने पर दोबारा उच्च न्यायालय में जाने की चेेतावनी दी। उन्होंने परिसीमन में गलत आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया।
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इधर, पालिका सभासद सुबोध बिष्ट ने कहा कि पालिका प्रशासन ने बंद कमरे में बैठकर परिसीमन किया है। पुराने राजस्व ग्रामों, वार्डों की अनदेखी कर नए नाम दिए जा रहे हैं। शिवालय वार्ड को अव्यवहारिक तरीके से तीन अलग-अलग वार्डों में बांटा जा रहा है। इस दौरान डीएम सी रविशंकर, पालिका के ईओ खीमानंद जोशी आदि अधिकारी थे। इस संबंध में डीएम का कहना है कि परिसीमन को लेकर आपत्तियां सुनी जा रही हैं। इसमें सभी को आपत्ति जताने का मौका दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनसुुनवाई पूरी होने के बाद परिसीमन का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
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नहीं मिली सुनवाई की सूचना
प्रशासन की जनसुनवाई के दौरान क्षेत्रवासियों ने सूचना न देने का आरोप लगाया। उन्होंने परिसीमन को लेकर प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठाए। इस दौरान भगवान सिंह रावत, मदनमोहन जोशी आदि ने कहा कि परिसीमन को लेकर जनता तो दूर जनप्रतिनिधियों को भी सूचना नहीं दी गई। प्रशासन ने जनसुनवाई का प्रचार-प्रसार, इश्तेहार प्रकाशित करने, मुनादी कराने की जहमत नहीं उठाई। इसके चलते तमाम जनप्रतिनिधि और जनता सुनवाई में शामिल नहीं हो पाए।