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पंचेश्वर बांध की जनसुनवाई स्थगित की जाए

Thu, 27 Jul 2017 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Thu, 27 Jul 2017 10:53 PM IST
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Public hearing should be postponed
पंचेश्वर बांध की जनसुनवाई के विरोध में पुतला दहन करते झूलाघाट के लोग - फोटो : अमर उजाला

पंचेश्वर बांध की जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग को लेकर महाकाली की आवाज संगठन के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को उत्तराखंड पर्यावरण बोर्ड का पुतला फूंका। आगाह किया कि सरकार ने जबरन 11 अगस्त को जनसुनवाई करने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। लोग किसी भी दशा में 11 अगस्त को जनसुनवाई कराए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

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महाकाली पर प्रस्तावित भारत और नेपाल के साझा उपक्रम पंचेश्वर बांध की 11 अगस्त को होने वाली जनसुनवाई के विरोध में अब रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। महाकाली की आवाज संगठन के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उत्तराखंड का पुतला फूंका। पुतला फूंकते समय डूब क्षेत्र के कानड़ी, गेठिगाड़ा और सीमू गांव के लोग भी शामिल हुए।
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महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि सरकार ने जनसुनवाई की सूचना का कोई प्रचार नहीं किया है। इस कारण महाकाली के किनारे बसे 89 गांवों में से अधिकांश के पास अब तक न तो जनसुनवाई की तिथि की सूचना पहुंच पाई है और न स्थान के बारे में ही कुछ बताया गया है। समाजसेवी हरिबल्लभ भट्ट ने कहा कि अगस्त में बारिश और तेज होती है। संचार और सड़क यातायात पर असर पड़ता है। ऐसे में जिला मुख्यालय बुलाकर जनसुनवाई करना उचित नहीं है। सरकार को मानसून सीजन के बाद गांव-गांव में जनसुनवाई करनी चाहिए। पुतला फूंकने वालों में जीवन भट्ट, भोला दत्त जोशी, सुरेंद्र लुंठी, जगदीश ओली, मनोज जोशी, नीरज भट्ट, गेठिगाड़ा के सरपंच पुष्कर गोबाड़ी आदि शामिल थे।
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सोशल मीडिया से उठ रही पंचेश्वर बांध के खिलाफ आवाज
पंचेश्वर बांध के विरोध को गति देने के लिए झूलाघाट में सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग हो रहा है। वाट्सऐप पर महाकाली की आवाज, बांध का विरोध नाम से ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुपों से बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों को जोड़ा गया है। बांध बनाने के विरोध में यदि कहीं पर भी धरना-प्रदर्शन हो रहे हों तो उसकी जानकारी ग्रुप में दी जा रही है। भविष्य में प्रस्तावित आंदोलन, जनसुनवाई का विरोध आदि के लिए लोगों को लामबंद करने में इन ग्रुप का ही सहारा लिया जा रहा है। महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत ने कहा कि बांध की डीपीआर में कई प्रकार की विसंगतियां हैं। डीपीआर बनाते समय गांवों और कस्बों के हितों की अनदेखी की गई है। इसके अलावा जनसुनवाई के लिए जिला मुख्यालयों का चयन किया गया है। इससे लोग परेशान हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बांध बनाने का पुरजोर विरोध होगा और डूब क्षेत्र के सभी गांवों को संगठित करने का काम शुरू हो चुका है। इधर, माटू जनसंगठन ने भी फेसबुक के माध्यम से बांध बनाने का विरोध शुरू कर दिया है। माटू जनसंगठन के संयोजक विनय भाई गांव गांव जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और जनता को बड़े बांधों के नुकसान बता रहे हैं। अभी बांध निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है, लेकिन बांध के विरोध में आंदोलन तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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