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पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित हो रही चरी
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 19 Feb 2017 10:17 PM IST
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भैंसखाल गांव में जानवरों को चारा खिलाने के लिए की गई व्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला
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नाचनी के भैंसखाल ग्राम पंचायत में एकीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) के तहत पालतू पशुओं को शुद्ध चारा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई चरी (चारादानी) पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इससे पशुओं को शुद्ध चारा तो मिल ही रहा है साथ ही पशुओं में बीमारी का खतरा भी कम हो गया है।
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वर्तमान में नाचनी क्षेत्र में जलागम परियोजना का फेज टू का काम चल रहा है। भैंसखाल की प्रधान चंद्रकला दानू ने परियोजना के तहत पशुओं को शुद्ध चारा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए। उन्होंने स्वयं अपने घर से इसकी शुरुआत की। उन्होंने चार महीने पहले चरी का निर्माण कराया। इसके बाद ग्राम पंचायत को लोगों में चरी निर्माण की होड़ लग गई। प्रधान अब तक 60 पशुपालकों के घरों में 315 चरी का निर्माण करा चुकी हैं। चरी में पशुओं को पानी पिलाने की भी सुविधा है। एक पशु के लिए चरी बनाने में 3500 रुपए की लागत आई है। लागत का 20 प्रतिशत यानि कि 700 रुपए लाभार्थी को अंशदान करना है।
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बता दें कि पहाड़ के गांवों में अब भी पाषाणकालीन विधि से ही पशुपालन का काम होता है। आवासीय मकान के निचले हिस्से में बनी गौशालाओं में गोबर में ही चारा डाल दिया जाता है। इस दूषित चारे को खाने से पशुओं में बीमारी का अंदेशा रहता है। गोबर, मूत्र में चारा पड़ा होने से 30 प्रतिशत चारा बर्बाद हो जाता है। चरी बनने से साफ चारा पशुओं को मिल रहा है। चारा बर्बाद होने की समस्या से भी निजात मिल गई है। प्रधान चंद्रकला दानू बताती हैं कि ग्राम पंचायत में दो निर्धन पशुपालकों के लिए 60,000 रुपए प्रत्येक की लागत की दो गौशालाओं का निर्माण कराया गया है। चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 97,000 रुपए प्रत्येक की लागत के दो सिंचाई टैंक बनवाए गए हैं।
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गोबर गैस प्लांट लगाने की बन रही योजना
उप परियोजनाधिकारी ग्राम्या डा. आरके सिंह कहते हैं कि भैंसखाल के पशुपालकों के वहां गोबर गैस प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। इससे वनों पर दबाव घटेगा। एलपीजी की खपत कम होगी। पशुपालकों को खाद भी मिलेगी। उन्होंने बताया कि भैंसखाल के 20 पशुपालकों को चारा काटने की मशीन दी गई है। उनका कहना है कि गोबर का निस्तारण घर से दूर किया जाना चाहिए। पशुशालाएं घर से दूर होनी चाहिए। इससे स्वच्छता का वातावरण बनेगा। अन्य गांवों में भी चरी का निर्माण कराया जाएगा।
चरी निर्माण से पशुओं में बीमारी में कमी आएगी। इससे चारे की बचत होगी। चरी निर्माण पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो सकती है। -डा. संजय बसेड़ा, पशु चिकित्साधिकारी, नाचनी