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फलों का भरपूर उत्पादन पर उत्पादक की जेब खाली

Fri, 03 Feb 2017 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 03 Feb 2017 10:23 PM IST
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Producing a variety of fruits on the production of empty pockets
औने पौने दामों में बेचने पड़ रहे माल्टा फल - फोटो : अमर उजाला

पिथौरागढ़ जिले में सिटरस प्रजाति के फलों का भरपूर उत्पादन होने के बावजूद उत्पादक को कोई लाभ नहीं मिल पाता। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कुमाऊं मंडल विकास निगम अब इन फलों की खरीद नहीं करता है। उत्पादकों को यह फल औने-पौने दामों पर बेचने पड़ते हैं। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में माल्टा, संतरा, बड़ा नींबू (चूख), गलगल और कागजी नींबू का 17500 मीट्रिक टन उत्पादन होता है।

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उद्यान विभाग ने जिला मुख्यालय में विभागीय फल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। कुछ उत्पादक इस इकाई की मदद से माल्टा फलों का जूस तैयार करते हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय में चार प्राइवेट इकाईयां भी फल प्रसंस्करण का काम कर रही हैं। डीडीहाट, धारचूला और गंगोलीहाट में निजी स्तर पर फल प्रसंस्करण का काम हो रहा है। इन इकाईयों की क्षमता इतनी ज्यादा नहीं है कि सभी फलों का उपयोग कर लिया जाए। उत्पादक माल्टा और संतरा फलों को खुले बाजार में बेचने को विवश हैं। खुले बाजार में इनकी कीमत 50 पैसे से एक रुपए किलो तक ही मिल पाती है।
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जब तक केएमवीएन माल्टा फलों की खरीद करता था, तब तक उत्पादकों को घर के पास ही कीमत मिल जाती थी। निगम ने जगह-जगह फल संग्रह केंद्र भी बनाए थे। वर्ष 2005 के बाद निगम ने फलों की खरीद को घाटे का सौदा मानते हुए यह काम बंद कर दिया। तब से फल संग्रह केंद्र भी बंद हो गए और लोगों के सामने फलों को मार्केट उपलब्ध कराने की समस्या पैदा हो गई।
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उद्यान विभाग स्पष्ट नीति बनाए
मोस्टामानू के प्रगतिशील किसान इकबाल अहमद का कहना है कि उद्यान विभाग को फलों की मार्केटिंग के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। किसानों को फल बेचने के लिए खुद ही प्रयास करना पड़ता है। यदि फलों का जूस या अचार बनाना हो तो उसका खर्च भी किसान को खुद ही उठाना पड़ता है। 


बंदर नुकसान पहुंचा रहे
पहाड़ पर बंदरों के आतंक से फसलों के साथ-साथ फलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। बंदर पेड़ पर लगे हरे फलों को ही तोड़ खाते हैं। फल व्यवसाय के लिए जंगली जानवर ज्यादा मुसीबत बन रहे हैं। हर इलाके में बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

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