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Uttarakhand: आंकड़ों ने बताई पूरी कहानी, जानिये क्यों पिछड़ रहे हैं पहाड़ के सरकारी स्कूल?

Tue, 11 Nov 2025 02:17 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 11 Nov 2025 02:17 PM IST
सार

पिथौरागढ़ जिले में सरकारी स्कूलों की तुलना में दस गुना कम निजी स्कूल होने के बावजूद निजी स्कूलों में छात्र संख्या हजारों अधिक है। 1374 सरकारी स्कूलों में केवल 43,000 छात्र हैं, जबकि 141 निजी स्कूलों में 46,000 छात्र पढ़ रहे हैं।

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Private schools have more students than government schools in pithoragarh
पिथौरागढ़ नगर।

विस्तार

 

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पिथौरागढ़ जिले में निजी स्कूलों में बढ़ती और सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्रसंख्या सरकारी शिक्षा पर सवाल खड़े कर रही है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। सीमांत जिले में सरकारी स्कूलों के सापेक्ष निजी स्कूलों की संख्या 10 गुना कम है जबकि इनमें छात्रसंख्या हजारों अधिक है। यह आंकड़े सबको हैरान भी कर रहे हैं और परेशान भी।

 

सीमांत जिले में 86 हाईस्कूल, 128 इंटर कॉलेज, 958 प्राथमिक और 202 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें विद्यालयों में 43,000 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले में संचालित 141 निजी स्कूलों में छात्रसंख्या 46,000 है। आंकड़ों के मुताबिक 1374 सरकारी स्कूलों के मुताबले निजी स्कूलों में छात्रसंख्या आठ हजार अधिक है। छात्रसंख्या बढ़ाने के लिए प्रवेशोत्सव, आरटीई के तहत निशुल्क पुस्तकें देने, मिड डे मील सहित तमाम योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन योजनाओं में हर साल करोड़ों रुपये भी खर्च भी हो रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या न बढ़ना और इसमें लगातार आ रही कमी इन सभी योजनाओं को दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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शिक्षकों की कमी छात्रसंख्या घटने का बड़ा कारण
पिथौरागढ़ जिले में संचालित सरकारी स्कूलों में 4789 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष इनमें 3341 शिक्षक तैनात हैं और 1448 पद रिक्त हैं। गणित, विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण शिक्षकों के पद रिक्त होने से अभिभावक बच्चों के बेहतर भविष्य को देखते हुए इनका प्रवेश निजी स्कूलों में करा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी सरकारी स्कूलों में घटती छात्रसंख्या का प्रमुख कारण बन रही है।

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पलायन से भी घट रही छात्रसंख्या
पिथौरागढ़ जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या घटने का कारण पलायन भी है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए इनका प्रवेश शहरों के स्कूलों में कराया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या लगातार घट रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते दो दशकों में छात्रसंख्या शून्य होने से 104 प्राथमिक और 15 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटक गए हैं। 

 

सरकारी स्कूलों में छात्रसंख्या बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों की नियुक्ति शासन स्तर पर ही संभव है। इनकी कमी को दूर करने के लिए अतिथि शिक्षकों की तैनाती की गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए विभाग गंभीर है। -तरुण कुमार पंत, जिला शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़

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