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पिथौरागढ़: समय से पहले हुई भारी बर्फबारी बढ़ा न दे माइग्रेशन से लौटने वालों की चिंताएं
Wed, 27 Oct 2021 11:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 11:54 PM IST
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धारचूला की दारमा घाटी के गांवों में हुई ताजा बर्फबारी। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से इस बार समय से पहले भारी बर्फबारी हुई है। ऐसे में धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में माइग्रेशन पर गए लोगों की चिंताएं बढ़ गईं हैं। बर्फबारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा रहा है। भारी बर्फबारी और बारिश से कई जगह पैदल रास्ते ध्वस्त हो चुके हैं।
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करीब एक हजार लोग माइग्रेशन पर
धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में करीब एक हजार लोग माइग्रेशन पर गए हैं। दारमा, व्यास, चौदास घाटी और मुनस्यारी के 13 माइग्रेशन गांवों में बीते दिनों भारी बर्फबारी हुई है। बर्फबारी के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित बुग्याल बर्फ से पट गए हैं। ऐसे में माइग्रेशन पर गए लोगों के सामने मवेशियों को चराने आदि का संकट भी गहरा गया है।
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लोगों ने निचले क्षेत्रों की ओर लौटना शुरू कर दिया
कई उच्च हिमालयी गांवों से समय से पहले लोगों ने निचले क्षेत्रों की ओर लौटना शुरू कर दिया है। ऐसे में अगर मौसम ने करवट बदली तो माइग्रेशन पर गए लोगों की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग एक सप्ताह तक मौसम साफ रहने और बर्फबारी न होने की बात कह रहा है।
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बर्फबारी से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई खेती को नुकसान
धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में माइग्रेशन पर गए लोग आलू, मूली, पलथी, फाफर, कुट्टू आदि जड़ी-बूटियों की खेती करते हैं। सभी लोग अक्तूबर तक खेती समेट लेते हैं। पल्थी और फाफर की खेती ग्रामीण समेट चुके हैं, जबकि आलू, मूली की फसल अभी खेतों में ही है। इस बार जल्दी भारी बर्फबारी होने के कारण सब्जी को नुकसान पहुंचा है।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से इस बार अक्तूबर भारी बारिश और बर्फबारी हुई है। ऐसी बर्फबारी दिसंबर अंतिम सप्ताह और जनवरी में होती है। फिलहाल एक सप्ताह तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। - बिक्रम सिंह, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक।