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दो माह से पेयजल संकट से जूझ रही एक हजार की आबादी

Thu, 24 May 2018 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Thu, 24 May 2018 11:01 PM IST
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Population of one thousand people suffering from drinking water crisis for two months
पिथौरागढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में कंधे में रख कर लाते हैं पानी - फोटो : अमर उजाला

पाभै और जगतड़ गांव की एक हजार की आबादी दो माह से पेयजल संकट से जूझ रही है। परिवार और मवेशियों के लिए ग्रामीणों को एक किमी दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी ढोना पड़ रहा है। गांव की पेयजल योजना के अव्यवस्थित प्रबंधन और स्रोत का जलस्तर घटने से यह नौबत आई है। इस समस्या से आजिज आए ग्रामीणों ने जल्द निजात न मिलने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

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जल संस्थान ने वर्ष 1971 में रतवाली गांव के एक प्राकृतिक स्रोत के जरिये पाभै-जगतड़ पेयजल योजना का निर्माण किया था। कुछ वर्ष पहले तक इस योजना से निर्बाध आपूर्ति होती रही, लेकिन पिछले दो-तीन सालों से स्रोत का जलस्तर लगातार घटता जा रहा है। ऐन गर्मी के सीजन के बीच स्रोत का स्तर कम होने से इन गांवों में पेयजल के लिए हाहाकार मचने लगा है। पाभै की पांच सौ और जगतड़ की भी कमोबेश पांच सौ से अधिक आबादी पिछले दो माह से पेयजल संकट से जूझ रही है।
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ग्रामीणों को एक किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं की अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रभावित गांवों के प्रधान राजेंद्र प्रसाद, गौरव पांडेय, हेम पंत, नयन पंत, गोपेश पांडेय, अमन कुमार, संदीप कुमार, सूरज कुमार आदि का कहना है कि योजना से जलस्तर में कमी और जल संस्थान के अव्यवस्थित प्रबंधन के चलते यह समस्या पैदा हुई है। मानदेय पर नियुक्त कर्मचारी पानी देने में अनियमितता बरत रहे हैं।
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मरम्मत के नाम पर सरकारी धन ठिकाने लगाने का आरोप 
प्रभावित गांवों के बाशिंदों ने जल संस्थान पर योजना की मरम्मत के नाम पर सरकारी धन ठिकाने लगाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक योजना की मरम्मत में लाखों की रकम खर्च कर दी गई, लेकिन ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हो पा रही है। समस्या बताने पर भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं आता। कर्मचारी झूठी सूचना देकर अधिकारियों और प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं।


अपनी ही सरकार के खिलाफ जताई नाराजगी 
क्षेत्र के भाजपा मंडल अध्यक्ष ललित धानिक ने पेयजल योजना की बदहाली को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जल संस्थान के अधिकारी और कर्मचारियों को सरकार का डर नहीं रह गया है। योजना के संचालन में मनमानी की जा रही है। इसका खामियाजा एक हजार से अधिक आबादी को भुगतना पड़ रहा है।

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