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Pithoragarh News: बदहाल परिवहन व्यवस्थाः टपकती बसों में सफर की मजबूरी

Fri, 05 Jul 2024 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 05 Jul 2024 11:05 PM IST
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Poor transport system: forced to travel in leaky buses
टनकपुर वर्कशॉप में खड़ी रोडवेज की बस में बारिश का टपकता पानी। संवाद
पिथौरागढ़/चंपावत। पिथौरागढ़ और चंपावत में रोडवेज बसों में सफर करना मुश्किल भरा है। अधिकतर बसें मानक पूरा कर चुकी है। बसों की छतें टपक रही हैं। खिड़कियां टूटी हैं। सीटें फटी हैं। बरसात में इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों का बुरा हाल हो रहा है। रोडवेज प्रबंधन खटारा बसों पर ही यात्रा करा रहा है। यात्रियों में खटारा हो चुकी बसों को लेकर नाराजगी है।
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चंपावत। रोडवेज बसों में यात्रियों के लिए सफर करना आसान नहीं है। बसों की हालत बेहद खराब है। बारिश में कब बस की छत से पानी टपकने लगे कहा नहीं जा सकता।
चंपावत जिले में रोडवेज के टनकपुर और लोहाघाट डिपो हैं। दोनों ही डिपो खस्ताहाल बसों की समस्या से जूझ रहे हैं। बारिश में इन बसों में सफर करना मुश्किल भरा है। बारिश में यह बसें टपकती रहती हैं। जिन सीटों पर पानी टपकता है उनके आसपास कोई भी यात्री बैठना पसंद नहीं करता है। लोहाघाट और टनकपुर डिपो में ऐसी कई बसें है जो बारिश में टपकती हैं। इसके अलावा इन बसों की सीटें भी इस लायक नहीं है कि लोग आराम से बैठ सकें। यात्री किराया तो पूरा देते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं अधूरी हैं।
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कई बसों में कूड़ादान नहीं है तो कुछ में फर्स्ट एड बाक्स की कमी है। जिले में रोडवेज डिपो की खस्ताहाल बसों में यात्रियों के लिए सफर करना मुश्किल भरा होता है। टनकपुर डिपो के पास 85 बसें हैं। इसमें से 25 बसें सड़कों पर चलने के मानक पूरी कर चुकी हैं। जबकि 12 बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। लोहाघाट डिपो के पास 30 बसों का बेड़ा है। इसमें से पांच बसें टनकपुर वर्कशॉप में खड़ी हैं।
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मानक पूरे कर चुकी बसों की सीट से लेकर खिड़कियां तक खस्ताहाल

पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो की बसें खस्ताहाल हो चुकी हैं। पांच लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी किसी बस की सीट फटी है तो किसी बस में तेज बारिश में खिड़की या छत से पानी घुस जाता है। इससे यात्रियों के लिए 15 से 18 घंटे का सफर बेहद कष्टदायक हो जाता है। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो में वर्तमान में 58 बसें हैं। इनमें से लगभग अधिकांश बसें पहाड़ में चलने के निर्धारित मानक पूरे कर चुकी हैं। खस्ताहाल होने से नौ बसें इस समय ऑफ रूट हैं। जिन बसों का संचालन किया जा रहा है उन बसों का इंजन ही नहीं सीटें, खिड़कियां और छत भी जर्जर हो चुकी हैं। ज्यादातर बसों से यात्री दिल्ली, देहरादून के लिए सफर करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील वर्मा और सुबोध बिष्ट का कहना है कि खटारा हो चुकी बसों में सफर करने में लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के एआरएम रविशेखर कापड़ी का कहना है कि वर्तमान में वर्कशॉप में बसों की फिटनेस नियमित कराई जाती है। शासन को नई बसों की मांग भेजी गई है।
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