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Pithoragarh News: अपनी बोली, भाषा को व्यवहार में लाने का संकल्प लिया
Mon, 24 Jun 2024 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 24 Jun 2024 12:04 AM IST
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पिथौरागढ़ में आयोजित कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में सम्मानित साहित्यकार। संवाद
पिथौरागढ़। अपनी बोली, भाषा को व्यवहार में लाने के संकल्प के साथ दो दिवसीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन संपन्न हो गया। आदलि कुशलि मासिक पत्रिका की ओर से आयोजितसम्मेलन में कुमाऊं, गढ़वाल के साथ ही मित्र राष्ट्र नेपाल से पहुंचे साहित्यकारों ने भी विचार रखे।
सम्मेलन के दूसरे दिन लोक भाषास व्यवहार में ल्यूंनाकि चुनौती विषय पर हेम पंत ने अपनी भाषा साहित्य में सरलीकरण और कृपाल सिंह शीला ने बच्चों को बोली भाषा से जोड़ने के लिए कुमाउंनी पाठ्यक्रम की आवश्यकता बताई। भूपेंद्र सिंह ने घरों में अपनी दुदबोलि में ही बोलने पर जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने कहा कि लोक भाषाओं पर सरकार की अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। हमें जागरूकता की आवश्यकता है।
जगमोहन रावत ने कहा कि गढ़वाली और कुमाउंनी भाषा बोलने की शैली में फर्क है अन्यथा कुमाउंनी और गढ़वाली समान भाषाएं हैं। कुमाऊंनी और नेपाली भाषा के बीच संबंध विषय पर नेपाल के कर्ण दयाल ने कहा कुमाउंनी और नेपाली भाषा की भाव शैली एक ही है। पूर्व सांसद पूरन दयाल ने कहा नेपाल और भारत में रोटी बेटी का संबंध है इस कारण हमारी संस्कृति बोली भाषा एक जैसी है। भीम सिंह ने कहा कुमाऊंनी और नेपाली की भाषाओं में अति निकटता है, इनको एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है। डॉ. पीतांबर अवस्थी ने कहा कि नेपाल और भारत की संस्कृति और बोली भाषा किसी भी प्रकार अलग नहीं है।
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इस अवसर पर कुमाउंनी बोली, भाषा पर खुले सत्र में उपस्थित श्रोताओं ने प्रश्नोत्तरी माध्यम से आपसी चर्चा की। जोहार-मुनस्यार से आए जोहारी भाषा के जानकार भूपेंद्र बृजवाल ने कहा जोहारी भी कुमाउंनी की ही उपबोली है, जो हमेशा अछूती रह जाती है। इस भाषा को मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता है। आदलि कुशलि पत्रिका की संपादक सरस्वती कोहली ने सभी का आभार व्यक्त किया।
.......इनसेट..........
साहित्यकारों को किया सम्मानित
पिथौरागढ़। सम्मेलन में अपनी बोली भाषा के लिए कार्य कर रहे तीन साहित्यकारों पिथौरागढ़ के डाॅ. पीतांबर अवस्थी, मुन्नी पांडे और बागेश्वर के मोहन जोशी को आदलि कुशलि की ओर से कुमाऊंनी भाषा सेवी सम्मान प्रदान किया गया। महावीर रवांल्टा को लोक भाषा सेवी सम्मान से विभूषित किया गया। इजा बा संस्कार कुटीर की ओर से साहित्य के क्षेत्र में दिल्ली से आए रमेश हितैषी और संगीत के क्षेत्र में रवि शास्त्री, गीता पंत को सम्मानित किया गया। संवाद
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सम्मेलन के दूसरे दिन लोक भाषास व्यवहार में ल्यूंनाकि चुनौती विषय पर हेम पंत ने अपनी भाषा साहित्य में सरलीकरण और कृपाल सिंह शीला ने बच्चों को बोली भाषा से जोड़ने के लिए कुमाउंनी पाठ्यक्रम की आवश्यकता बताई। भूपेंद्र सिंह ने घरों में अपनी दुदबोलि में ही बोलने पर जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने कहा कि लोक भाषाओं पर सरकार की अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। हमें जागरूकता की आवश्यकता है।
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जगमोहन रावत ने कहा कि गढ़वाली और कुमाउंनी भाषा बोलने की शैली में फर्क है अन्यथा कुमाउंनी और गढ़वाली समान भाषाएं हैं। कुमाऊंनी और नेपाली भाषा के बीच संबंध विषय पर नेपाल के कर्ण दयाल ने कहा कुमाउंनी और नेपाली भाषा की भाव शैली एक ही है। पूर्व सांसद पूरन दयाल ने कहा नेपाल और भारत में रोटी बेटी का संबंध है इस कारण हमारी संस्कृति बोली भाषा एक जैसी है। भीम सिंह ने कहा कुमाऊंनी और नेपाली की भाषाओं में अति निकटता है, इनको एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है। डॉ. पीतांबर अवस्थी ने कहा कि नेपाल और भारत की संस्कृति और बोली भाषा किसी भी प्रकार अलग नहीं है।
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इस अवसर पर कुमाउंनी बोली, भाषा पर खुले सत्र में उपस्थित श्रोताओं ने प्रश्नोत्तरी माध्यम से आपसी चर्चा की। जोहार-मुनस्यार से आए जोहारी भाषा के जानकार भूपेंद्र बृजवाल ने कहा जोहारी भी कुमाउंनी की ही उपबोली है, जो हमेशा अछूती रह जाती है। इस भाषा को मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता है। आदलि कुशलि पत्रिका की संपादक सरस्वती कोहली ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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साहित्यकारों को किया सम्मानित
पिथौरागढ़। सम्मेलन में अपनी बोली भाषा के लिए कार्य कर रहे तीन साहित्यकारों पिथौरागढ़ के डाॅ. पीतांबर अवस्थी, मुन्नी पांडे और बागेश्वर के मोहन जोशी को आदलि कुशलि की ओर से कुमाऊंनी भाषा सेवी सम्मान प्रदान किया गया। महावीर रवांल्टा को लोक भाषा सेवी सम्मान से विभूषित किया गया। इजा बा संस्कार कुटीर की ओर से साहित्य के क्षेत्र में दिल्ली से आए रमेश हितैषी और संगीत के क्षेत्र में रवि शास्त्री, गीता पंत को सम्मानित किया गया। संवाद