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पिथौरागढ़: 46 साल बाद पेंशन...बेटी की जिद ने दिखाई राह, पूर्व सैनिक संगठन की पैरवी से मिला न्याय
Wed, 07 Oct 2026 04:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 07 Oct 2026 04:05 AM IST
सार
बेटी ने मां की पीड़ा को अपनी लड़ाई बनाया और लंबी पैरवी के बाद उन्हें 18 हजार रुपये मासिक पेंशन और आठ लाख रुपये एकमुश्त मिले।
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- फोटो : एआई
विस्तार
डीडीहाट के सैनिक मनोहर सिंह की मृत्यु के 46 साल बाद उनकी पत्नी पार्वती देवी को आखिरकार पारिवारिक पेंशन का हक मिल गया। महज 19 साल की उम्र में विधवा हुईं पार्वती उस समय चार माह की गर्भवती थीं। पति की मौत के बाद उन्होंने बेटी जीवंती को अकेले पाला। बेटी ने मां की पीड़ा को अपनी लड़ाई बनाया और लंबी पैरवी के बाद उन्हें 18 हजार रुपये मासिक पेंशन और आठ लाख रुपये एकमुश्त मिले।
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कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात मनोहर सिंह की वर्ष 1980 में महज 20 साल की उम्र में मृत्यु हुई थी। इसके बाद पारिवारिक पेंशन उनके पिता के नाम हो गई, जिससे पार्वती को इसका लाभ नहीं मिल सका। वह बेटी के साथ मायके में रहीं और अभावों के बीच उसका पालन-पोषण किया। बेटी जीवंती ने शादी के बाद भी मां का संघर्ष देखा और उनके हक के लिए आवाज उठाने का फैसला किया।
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2024 में शुरू हुई पैरवी
वर्ष 2024 में जीवंती ने मामला पूर्व सैनिक संगठन के सामने रखा। संगठन के क्षेत्रीय संयोजक दीवान सिंह ने संबंधित कार्यालयों से संपर्क कर पेंशन से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। लंबी कार्रवाई के बाद 46 साल पुराना मामला सुलझा और पार्वती को हक मिल गया।
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पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मयूख भट्ट ने कहा कि दिवंगत सैनिक की पत्नी को पारिवारिक पेंशन दिलाने की लड़ाई सफल हुई है। संगठन आगे भी इसी तरह लोगों की मदद करता रहेगा।