{"_id":"605b8d5b8ebc3e592e0eaa22","slug":"pithoragarh-ghat-national-highway-opens-after-26-hours-pithoragarh-news-hld4194412125","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग 26 घंटे बाद खुला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग 26 घंटे बाद खुला
विज्ञापन
पिथौरागढ़-घाट एनएच के चुपकोट बैंड में सड़क बंद होने से फंसे वाहन। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। चुपकोट बैंड के पास मलबा आने से बंद पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग 26 घंटे बाद खुला। हाईवे पर करीब 2500 से अधिक वाहन फंसे रहे। इस दौरान सैकड़ों यात्रियों को धूप में भूखा प्यासा रहना पड़ा। ट्रक और बसों के चालक-परिचालक भी परेशान रहे।
मंगलवार को लगभग दोपहर 12 बजे चुपकोट बैंड के पास पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ गया था। अधिक मलबा होने के कारण शाम सात बजे अंधेरा होते ही काम बंद करना पड़ा। सड़क न खुलने से दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की कतार लग गई थी। बसों और टैक्सियों के सभी यात्रियों ने मटेला से पैदल चलकर दूसरे वाहन पकड़े। ट्रकों और टैंकरों सहित निजी वाहनों के चालक मौके पर ही फंसे रह गए।
बुधवार की सुबह मैदानी क्षेत्रों से आ रहे वाहनों और पिथौरागढ़ से घाट की ओर जा रहे वाहनों की कतार लंबी होती रही। सुबह सात बजे दिल्ली-देहरादून की बसें पहुंचनी शुरू हो गई थीं। सड़क खुलने की उम्मीद में यात्री बस में इंतजार करते रहे। महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मटेला के एक रेस्टोरेंट और दुकान से लोगों ने खाने पीने की चीजें खरीदीं। यात्री दिन भर बसों में बैठे रहे। जबकि कुछ पैदल ही आगे बढ़ने लगे।
विज्ञापन
भारी भरकम सामान के साथ चढ़ाई चढ़ने में महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हुई। बुधवार की सुबह से ही मलबा हटाने का काम शुरू हो गया था। मलबे को पोकलैंड मशीनों की मदद से डंपरों में भरकर कुछ दूूरी पर सड़क किनारे डंप किया गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे पूरा मलबा हटाया जा सका। इसके बाद वाहनों का संचालन शुरू हुआ। दोनों ओर फंसे ढाई हजार से अधिक वाहन गंतव्य को रवाना हुए। मौके पर मौजूद ठेकेदार प्रकाश जोशी ने बताया कि चुपकोट बैंड पर पहाड़ी के बेहद कमजोर होने से अब भी लगातार मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है।
यात्रियों से लिया मनमाना किराया
पिथौरागढ़। सड़क बंद होने का फायदा कुछ टैक्सी चालकों ने जमकर उठाया और यात्रियों से अधिक किराया वसूला। लोहाघाट से आ रही कुछ महिलाओं ने बताया कि पिथौरागढ़ तक का किराया 200 रुपये है, लेकिन उनसे मटेला तक के 200 रुपये ले लिए। जब यात्री मटेला से खड़ी चार सौ मीटर की चढ़ाई चढ़कर पहुंचे तो वहां से भी पिथौरागढ़ का मनमाना किराया लिया गया। आधा दर्जन से अधिक बसों के फंसे होने के बावजूद यात्रियों को लाने के लिए रोडवेज डिपो से कोई बसें नहीं भेजी गईं। ऐसे में यात्रियों को अधिक किराया देकर पिथौरागढ़ पहुंचना पड़ा।
चुपकोट बैंड पर शवदाह वाले वाहन भी फंस गए। सुबह एक शव को मटेला बैंड से पैदल ले जाया गया। इस दौरान शवयात्रा में शामिल लोगों को काफी परेशानी हुई। दोपहर लगभग 12 बजे एक और शव को लेकर गया वाहन लगभग डेढ़ घंटे तक फंसा रहा। सड़क खुलने के बाद वाहन शव दाह के लिए रामेश्वर के लिए रवाना हुआ। सड़क बंद होने से रोडवेज ने बुधवार को सात बसों का संचालन थल-बेड़ीनाग रूट से किया। देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली की ये बसें यात्रियों को लेकर हल्द्वानी के लिए रवाना हुईं। इसके अलावा आपात स्थिति में कुछ लोग निजी वाहनों से भी थल-बेड़ीनाग-सेराघाट होते हुए हल्द्वानी रवाना हुए।
युवाओं ने जान जोखिम में डाली
पिथौरागढ़। सड़क बंद होने के कारण जहां वाहन चालकों ने 24 घंटे तक प्रतीक्षा की वहीं कुछ दोपहिया वाहन सवारों ने जान जोखिम में डालकर बेहद ढलान वाली पगडंडी से ही वाहन ले जाने शुरू कर दिए। ढलान और खेतों से होते हुए बाइक चलाने में कुछ स्थानों पर थोड़ी सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी। इसी तरह से मटेला से ऊपर बैंड तक युवक मोटरसाइकिल और स्कूटी लेकर पहुंचे। जबकि इस रास्ते में कुछ स्थानों पर सीढ़ियां होने से इन युवकों को वाहन पीछे से उठाकर ऊपर पहुंचाने पड़े। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी भी हुई।
विज्ञापन
मंगलवार को लगभग दोपहर 12 बजे चुपकोट बैंड के पास पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ गया था। अधिक मलबा होने के कारण शाम सात बजे अंधेरा होते ही काम बंद करना पड़ा। सड़क न खुलने से दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की कतार लग गई थी। बसों और टैक्सियों के सभी यात्रियों ने मटेला से पैदल चलकर दूसरे वाहन पकड़े। ट्रकों और टैंकरों सहित निजी वाहनों के चालक मौके पर ही फंसे रह गए।
विज्ञापन
बुधवार की सुबह मैदानी क्षेत्रों से आ रहे वाहनों और पिथौरागढ़ से घाट की ओर जा रहे वाहनों की कतार लंबी होती रही। सुबह सात बजे दिल्ली-देहरादून की बसें पहुंचनी शुरू हो गई थीं। सड़क खुलने की उम्मीद में यात्री बस में इंतजार करते रहे। महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मटेला के एक रेस्टोरेंट और दुकान से लोगों ने खाने पीने की चीजें खरीदीं। यात्री दिन भर बसों में बैठे रहे। जबकि कुछ पैदल ही आगे बढ़ने लगे।
विज्ञापन
भारी भरकम सामान के साथ चढ़ाई चढ़ने में महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हुई। बुधवार की सुबह से ही मलबा हटाने का काम शुरू हो गया था। मलबे को पोकलैंड मशीनों की मदद से डंपरों में भरकर कुछ दूूरी पर सड़क किनारे डंप किया गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे पूरा मलबा हटाया जा सका। इसके बाद वाहनों का संचालन शुरू हुआ। दोनों ओर फंसे ढाई हजार से अधिक वाहन गंतव्य को रवाना हुए। मौके पर मौजूद ठेकेदार प्रकाश जोशी ने बताया कि चुपकोट बैंड पर पहाड़ी के बेहद कमजोर होने से अब भी लगातार मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है।
यात्रियों से लिया मनमाना किराया
पिथौरागढ़। सड़क बंद होने का फायदा कुछ टैक्सी चालकों ने जमकर उठाया और यात्रियों से अधिक किराया वसूला। लोहाघाट से आ रही कुछ महिलाओं ने बताया कि पिथौरागढ़ तक का किराया 200 रुपये है, लेकिन उनसे मटेला तक के 200 रुपये ले लिए। जब यात्री मटेला से खड़ी चार सौ मीटर की चढ़ाई चढ़कर पहुंचे तो वहां से भी पिथौरागढ़ का मनमाना किराया लिया गया। आधा दर्जन से अधिक बसों के फंसे होने के बावजूद यात्रियों को लाने के लिए रोडवेज डिपो से कोई बसें नहीं भेजी गईं। ऐसे में यात्रियों को अधिक किराया देकर पिथौरागढ़ पहुंचना पड़ा।
चुपकोट बैंड पर शवदाह वाले वाहन भी फंस गए। सुबह एक शव को मटेला बैंड से पैदल ले जाया गया। इस दौरान शवयात्रा में शामिल लोगों को काफी परेशानी हुई। दोपहर लगभग 12 बजे एक और शव को लेकर गया वाहन लगभग डेढ़ घंटे तक फंसा रहा। सड़क खुलने के बाद वाहन शव दाह के लिए रामेश्वर के लिए रवाना हुआ। सड़क बंद होने से रोडवेज ने बुधवार को सात बसों का संचालन थल-बेड़ीनाग रूट से किया। देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली की ये बसें यात्रियों को लेकर हल्द्वानी के लिए रवाना हुईं। इसके अलावा आपात स्थिति में कुछ लोग निजी वाहनों से भी थल-बेड़ीनाग-सेराघाट होते हुए हल्द्वानी रवाना हुए।
युवाओं ने जान जोखिम में डाली
पिथौरागढ़। सड़क बंद होने के कारण जहां वाहन चालकों ने 24 घंटे तक प्रतीक्षा की वहीं कुछ दोपहिया वाहन सवारों ने जान जोखिम में डालकर बेहद ढलान वाली पगडंडी से ही वाहन ले जाने शुरू कर दिए। ढलान और खेतों से होते हुए बाइक चलाने में कुछ स्थानों पर थोड़ी सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी। इसी तरह से मटेला से ऊपर बैंड तक युवक मोटरसाइकिल और स्कूटी लेकर पहुंचे। जबकि इस रास्ते में कुछ स्थानों पर सीढ़ियां होने से इन युवकों को वाहन पीछे से उठाकर ऊपर पहुंचाने पड़े। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी भी हुई।