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पिथौरागढ़ के बच्चों में भी बंदरों का डर

Sat, 02 Apr 2016 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 02 Apr 2016 10:45 PM IST
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Pithoragarh a child afraid of monkeys
बंदर - फोटो : अमर उजाला

आज बंदर ने हमारे घर में घुसकर फ्रिज खोल दिया था, मम्मी ने सुबह नाश्ते के लिए रोटी बनाई थी, एक बंदर आकर उठा ले गया। एक दिन बंदर रोशनदान के रास्ते अंदर घुस आया, घर में कोई नहीं था, उसने मंदिर में रखे सारे फल खा दिए, पापा हमें छत पर नहीं जाने देते, क्योंकि वहां बंदर होते हैं, पापा भी जब छत में जाते हैं तो बंदर भगाने को हाथ में डंडा ले जाते हैं, मुझे स्कूल बस में बैठाने के लिए बुआ आती है क्योंकि रास्ते में बंदर मिलते हैं, मम्मी गेहूं सुखाने के लिए छत पर नहीं डालती, क्योंकि एक बार सुखाने को रखे सारे गेहूं बंदरों ने चट कर दिए थे, हमारे आंगन में लगी ककड़ी को मेरे सामने ही बंदर तोड़ ले गया, उसके तो बंदर ने पीठ पर पंजा मारा था।

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पता नहीं रोज बंदरों के बारे में क्या-क्या किस्से तैयार हो रहे हैं। बंदर सर्वव्यापी हो गए हैं। अल्मोड़ा के बच्चों ने बंदरों के आतंक को समाप्त करने को लेकर हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। यहां के बच्चे इस पहल का स्वागत करते हैं और अपनी ओर से भी ऐसी पहल को तैयार हैं।
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बंदरों से डर लगता है
रई निवासी सौरभ चौहान का कहना है कि हमारे मोहल्ले को खूब बंदर आते हैं। मुझे बंदरों से बहुत डर लगता है। घर के लोग बंदरों को नहीं मारने देते। इनको हनुमान का रूप मानते हैं, जिस दिन बंदर मोहल्ले में नहीं आते, उस दिन मैं बड़ा खुश होता हूं। 
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कहां से आ गए इतने ज्यादा बंदर
टकाना निवासी साक्षी कहती हैं कि पहले शहर में बंदर नहीं आते थे। उनका डेरा जंगलों में होता था। अब पता नहीं कहां से इतने ज्यादा बंदर आ गए हैं। भगाने पर बंदर काटने को आते हैं। इनसे किसी तरह मुक्ति दिला दो। 

मुझे सपने में भी बंदर ही दिखते हैं
पितरौटा निवासी वैभव वर्मा का कहना है कि मुझे तो सपने में भी बंदर दिखते हैं। सपने में भी बंदरों को देखकर रोता हूं। घर से बाहर निकलने में इसलिए डर लगता है कि कहीं सीढ़ी में बंदर न बैठा हो। 

जब से होश संभाला बंदर ही दिखे
घंटाकरण निवासी आदित्य भंडारी का कहना है कि जब मैं बहुत छोटा था तभी से मेरे मन में बंदरों का खौफ है। जब मुझे होश आया तो हमारे घर के आसपास बंदरों को घूमते देखा। पहले लगा कि यह पालतू होंगे। 

बंदरों को जंगल में खदेड़ा जाए
धारचूला रोड निवासी मेघा कहती हैं कि बंदर घर के अंदर आ जाते हैं। वह खाने की चीजों पर झपटते हैं। बंदरों को जंगलों में खदेड़ा जाए। बंदरों को खाने की चीजें न मिलें तो वह आबादी की ओर नहीं आएंगे।

कुत्तों से ज्यादा डर बंदरों से
जीजीआईसी मोहल्ला निवासी भूपेश कांडपाल का कहना है कि बंदरों से मुक्ति का उपाय ढूंढना चाहिए। वरना यह ज्यादा खतरनाक होते जाएंगे। कुत्तों से ज्यादा डर बंदरों से लगता है। 

गांव में बंदरों से ज्यादा खतरा
बांस गांव निवासी नितेश का कहना है कि गांवों में बंदरों से ज्यादा खतरा है। हर पेड़, खाली जगह बंदर ही दिखते हैं। शहर के स्कूल आए तो साथियों से बंदरों की ही चर्चा सुनने को मिलती है। 


बंदरों ने छीन लिया है बचपन
मेल्टा निवासी मनीष का कहना है कि बचपन के आनंद को बंदरों ने छीन लिया है। अब खुले मैदान में खेलने जाते हैं तो बंदर हमला करने आते हैं। बंदर नाम से ही डर लगने लगा है।

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