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कैंपस बनने से फायदे कम नुकसान ज्यादा
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ महाविद्यालय में परिसर बनने का फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है। कैंपस बनने के इतने समय बाद भी यहां पर कोई नया व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है। कैंपस बनने के बाद बीए, बीएससी, बीकॉम में पहले की तुलना में सीटें काफी कम हुईं हैं। छात्र-छात्राएं प्रवेश के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। ऐसे में पिथौरागढ़ मुख्यालय में नया महाविद्यालय खोलने की मांग उठने लगी है।
पिथौरागढ़ महाविद्यालय को सितंबर 2020 में कैंपस का दर्जा मिला था। दावों के बावजूद कैंपस बनने के बाद यहां न तो कानून की पढ़ाई शुरू हो पाई है और न ही कोई नया व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू हो पाया है। उल्टा महाविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम में पहले की तुलना में सीटें काफी कम हो गईं हैं। छात्र प्रवेश के लिए दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। छात्र नेताओं ने कहा कि प्रवेश न मिलने के कारण छात्र-छात्राओं को मजबूरन उच्च शिक्षा के लिए पलायन करना पड़ रहा है।
नेपाल के छात्र भी आते हैं पढ़ने
पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र नेपाल और चीन सीमा से सटा है। पिथौरागढ़ महाविद्यालय में सीमा से सटे गांवों के बच्चों के साथ ही नेपाल से भी बड़ी संख्या में छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में कई बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंपस बनने के बाद छात्रावास का शुल्क भी कई गुना बढ़ जाएगा।
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कैंपस बनने से पहले बीए, बीएससी, बीकॉम में होते थे करीब तीन हजार प्रवेश
पिथौरागढ़। कैंपस बनने से पूर्व पिथौरागढ़ महाविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम में करीब तीन हजार से अधिक प्रवेश होते थे। अधिकतर छात्र- छात्राओं को आसानी से प्रवेश मिल जाता था। अब प्रवेश पाने के लिए छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंपस बनने से पूर्व पिथौरागढ़ महाविद्यालय में बीए में करीब 1400 प्रवेश, बीएससी में 900, बीकॉम में करीब 500 से अधिक प्रवेश होते हैं। कैंपस बनने के बाद बीए में 600 प्रवेश, बीएससी में 400, बीकॉम में 300 प्रवेश हो रहे हैं।
पिथौरागढ़ में नया महाविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग होने लगी तेज
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में नया महाविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग तेज होने लगी है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश पंत का कहना है कि पिथौरागढ़ में विश्वविद्यालय खोलने की मांग पिछले लंबे समय से चल रही थी, सरकार ने पिथौरागढ़ के बजाय अल्मोड़ा में विश्वविद्यालय खोल दिया।
पिथौरागढ़ महाविद्यालय को कैंपस का झुनझुना दे दिया। कैंपस खुलने के बाद सीटें कम हुईं हैं। व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी नहीं खुल पाए हैं। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिले इसके लिए पिथौरागढ़ नगरीय क्षेत्र में एक ओर महाविद्यालय खुलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए सीमांत के बच्चे पलायन करने के लिए मजबूर हैं। नया महाविद्यालय खुलने से उन्हें प्रवेश मिल जाएगा।
30 प्रतिशत सीटें बढ़ाने के लिए पत्राचार किया गया है। शीघ्र सीटें बढ़ने की उम्मीद हैं। सीमांत के बच्चों को अधिकतम प्रवेश दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - प्रो. पुष्कर सिंह बिष्ट, प्रभारी प्राचार्य, पिथौरागढ़ महाविद्यालय।
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पिथौरागढ़ महाविद्यालय को सितंबर 2020 में कैंपस का दर्जा मिला था। दावों के बावजूद कैंपस बनने के बाद यहां न तो कानून की पढ़ाई शुरू हो पाई है और न ही कोई नया व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू हो पाया है। उल्टा महाविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम में पहले की तुलना में सीटें काफी कम हो गईं हैं। छात्र प्रवेश के लिए दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। छात्र नेताओं ने कहा कि प्रवेश न मिलने के कारण छात्र-छात्राओं को मजबूरन उच्च शिक्षा के लिए पलायन करना पड़ रहा है।
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नेपाल के छात्र भी आते हैं पढ़ने
पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र नेपाल और चीन सीमा से सटा है। पिथौरागढ़ महाविद्यालय में सीमा से सटे गांवों के बच्चों के साथ ही नेपाल से भी बड़ी संख्या में छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में कई बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंपस बनने के बाद छात्रावास का शुल्क भी कई गुना बढ़ जाएगा।
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कैंपस बनने से पहले बीए, बीएससी, बीकॉम में होते थे करीब तीन हजार प्रवेश
पिथौरागढ़। कैंपस बनने से पूर्व पिथौरागढ़ महाविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम में करीब तीन हजार से अधिक प्रवेश होते थे। अधिकतर छात्र- छात्राओं को आसानी से प्रवेश मिल जाता था। अब प्रवेश पाने के लिए छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंपस बनने से पूर्व पिथौरागढ़ महाविद्यालय में बीए में करीब 1400 प्रवेश, बीएससी में 900, बीकॉम में करीब 500 से अधिक प्रवेश होते हैं। कैंपस बनने के बाद बीए में 600 प्रवेश, बीएससी में 400, बीकॉम में 300 प्रवेश हो रहे हैं।
पिथौरागढ़ में नया महाविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग होने लगी तेज
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में नया महाविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग तेज होने लगी है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश पंत का कहना है कि पिथौरागढ़ में विश्वविद्यालय खोलने की मांग पिछले लंबे समय से चल रही थी, सरकार ने पिथौरागढ़ के बजाय अल्मोड़ा में विश्वविद्यालय खोल दिया।
पिथौरागढ़ महाविद्यालय को कैंपस का झुनझुना दे दिया। कैंपस खुलने के बाद सीटें कम हुईं हैं। व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी नहीं खुल पाए हैं। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिले इसके लिए पिथौरागढ़ नगरीय क्षेत्र में एक ओर महाविद्यालय खुलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए सीमांत के बच्चे पलायन करने के लिए मजबूर हैं। नया महाविद्यालय खुलने से उन्हें प्रवेश मिल जाएगा।
30 प्रतिशत सीटें बढ़ाने के लिए पत्राचार किया गया है। शीघ्र सीटें बढ़ने की उम्मीद हैं। सीमांत के बच्चों को अधिकतम प्रवेश दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - प्रो. पुष्कर सिंह बिष्ट, प्रभारी प्राचार्य, पिथौरागढ़ महाविद्यालय।