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पिथौरागढ़ जिले को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच सिल्वर अवार्ड मिला
Thu, 28 Feb 2019 10:28 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Thu, 28 Feb 2019 10:28 PM IST
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दिल्ली में स्कॉच अवार्ड प्राप्त करते परियोजना अधिकारी डीडी पंत।
- फोटो : पिथौरागढ़
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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में शत प्रतिशत उपलब्धि के लिए पिथौरागढ़ जिले को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ है। जिले को दो कांस्य पदक भी प्राप्त हुए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में परियोजना निदेशक डीआरडीए डीडी पंत ने यह अवार्ड प्राप्त किए।
मुख्य विकास अधिकारी वंदना ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 631 आवास बनाने का लक्ष्य जिले को प्राप्त हुआ था। 31 मार्च 2018 तक 248 आवास पूरे हो गए थे। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट प्राप्त होने के पश्चात तेजी से काम किया गया और 631 आवासों का निर्माण कार्य पूरा किया गया।
जिले में तीन लाभार्थी ऐसे थे, जिनका आवास बनाना काफी मुश्किल हो रहा था।
इसमें से मुनस्यारी के हरकोट के एक परिवार ऐसा था, जिसके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी, बच्चे छोटे थे। इसके अलावा कनालीछीना के एक परिवार के दोनों लोग मानसिक रूप से बीमार थे। गंगोलीहाट का भी एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था। इन तीनों परिवार के आवास बनाने में समस्या आ रही थी।
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संबंधित ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने व्यक्तिगत रुचि लेकर इन आवासों का निर्माण कराया। बताया कि ग्राम्या परियोजना के अंतर्गत 63 ग्राम पंचायतों में विधवा, दिव्यांग व्यक्तियों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आजीविका को बढ़ाने का काम किया गया। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक प्राप्त हुए हैं।
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मुख्य विकास अधिकारी वंदना ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 631 आवास बनाने का लक्ष्य जिले को प्राप्त हुआ था। 31 मार्च 2018 तक 248 आवास पूरे हो गए थे। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट प्राप्त होने के पश्चात तेजी से काम किया गया और 631 आवासों का निर्माण कार्य पूरा किया गया।
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जिले में तीन लाभार्थी ऐसे थे, जिनका आवास बनाना काफी मुश्किल हो रहा था।
इसमें से मुनस्यारी के हरकोट के एक परिवार ऐसा था, जिसके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी, बच्चे छोटे थे। इसके अलावा कनालीछीना के एक परिवार के दोनों लोग मानसिक रूप से बीमार थे। गंगोलीहाट का भी एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था। इन तीनों परिवार के आवास बनाने में समस्या आ रही थी।
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संबंधित ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने व्यक्तिगत रुचि लेकर इन आवासों का निर्माण कराया। बताया कि ग्राम्या परियोजना के अंतर्गत 63 ग्राम पंचायतों में विधवा, दिव्यांग व्यक्तियों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आजीविका को बढ़ाने का काम किया गया। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक प्राप्त हुए हैं।